दीदी के गढ़ में महा-विस्फोट! Yusuf Pathan और Saayoni Ghosh समेत 19 सांसदों ने छोड़ी Mamata Banerjee की TMC, असली पार्टी होने का ठोका दावा!

 Mamata Banerjee
ANI
रेनू तिवारी । Jun 12 2026 11:49AM

ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर के शायद सबसे बुरे संकट का सामना कर रही हैं। उनकी अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) कई सीनियर नेताओं और विधायकों की बगावत के बाद अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर के सबसे भीषण अंतर्विरोध और संकट के दौर से गुजर रही हैं। विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक कलह अब पूरी तरह सड़क पर आ गया है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 सांसदों ने खुली बगावत कर दी है। इंडिया टुडे को बागी सांसदों के उस ग्रुप की सीक्रेट चिट्ठी की कॉपी मिली है, जो उन्होंने लोकसभा स्पीकर को सौंपी है। इन सांसदों ने खुद को "असली तृणमूल कांग्रेस" बताते हुए संसद में एक अलग गुट बनाने और पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने का फैसला किया है। इस बगावत के बाद ममता बनर्जी के पाले में अब केवल 9 सांसद ही बचे हैं।

 

18 मई की तारीख वाली इस चिट्ठी पर 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इन सांसदों ने एक अलग संसदीय गुट बनाने का समर्थन किया है और अब TMC के चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोक रहे हैं। उनका कहना है कि वे ही "असली" तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से केवल नौ ही बागी गुट से बाहर बचे हैं, हालांकि कुछ सदस्यों की स्थिति अभी भी साफ़ नहीं है।

हस्ताक्षर करने वालों में ये शामिल हैं:

काकोली घोष दस्तीदार

शताब्दी रॉय

बापी हलदर

डॉ. शर्मिला सरकार

प्रसून बनर्जी

जगदीश बर्मा बसुनिया

असित कुमार मल

अरूप चक्रवर्ती

रचना बनर्जी

सायनी घोष

खलीलु्र रहमान

अबू ताहिर खान

यूसुफ़ पठान

मिताली बाग

माला रॉय

कालीपदा सोरेन

दीपक अधिकारी

जून मालिया

पार्थ भौमिक

सूत्रों ने बताया कि बागी सांसदों ने स्पीकर को एक अलग संसदीय समूह के तौर पर काम करने के अपने इरादे के बारे में बता दिया है। बागी गुट का कहना है कि उनका BJP या NDA में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि वे स्वतंत्र रूप से काम करेंगे और पश्चिम बंगाल के हितों के लिए काम करेंगे।

माना जा रहा है कि यह ग्रुप संसद में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल (डिलिमिटेशन बिल) को पास कराने की केंद्र सरकार की कोशिशों पर भी बारीकी से नज़र रख रहा है।

TMC का गहराता संकट

यह ताज़ा घटनाक्रम TMC सांसदों के बीच बढ़ती नाराज़गी की खबरों के कुछ दिनों बाद सामने आया है। कई नेताओं ने पार्टी के कामकाज और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को लेकर असंतोष ज़ाहिर किया है। संसद में हुई बगावत से पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी ऐसी ही अभूतपूर्व बगावत हुई थी, जहाँ बड़ी संख्या में विधायकों ने पार्टी के विधायक दल से अलग होकर TMC के 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा अंदरूनी संकट खड़ा कर दिया था।

इस चिट्ठी का समय भी स्पीकर के फ़ैसले में एक अहम भूमिका निभा सकता है। सूत्रों का कहना है कि बागी सांसदों की चिट्ठी पर 18 मई की तारीख़ है, जो वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को 19 मई को लोकसभा में पार्टी का चीफ़ व्हिप नियुक्त किए जाने से एक दिन पहले की तारीख़ है। अब स्पीकर को यह तय करना होगा कि क्या बागी गुट को तकनीकी और प्रक्रियात्मक आधार पर मान्यता दी जा सकती है या नहीं।

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क्या कानूनी लड़ाई शुरू होने वाली है?

इस बगावत ने पार्टी पर नियंत्रण को लेकर एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की संभावना भी पैदा कर दी है। उम्मीद है कि बागी गुट चुनाव आयोग के सामने TMC के चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश करेगा और तर्क देगा कि वही पार्टी की संसदीय ताकत के बहुमत का प्रतिनिधित्व करता है। चुनाव आयोग के किसी भी फ़ैसले को हारने वाला पक्ष चुनौती दे सकता है, जिससे यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच सकता है।

बागी गुट से सार्वजनिक रूप से दूरी बनाने वालों में वरिष्ठ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल हैं; उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई और बागी गुट का समर्थन करने वाली किसी भी चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया।

अभिषेक बनर्जी, सौगत राय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी, कीर्ति आज़ाद, प्रतिमा मंडल, साजिदा अहमद और सुदीप बंद्योपाध्याय के साथ-साथ वे भी उन सांसदों में शामिल हैं जो अभी बागी गुट से नहीं जुड़े हैं।

TMC के संसदीय विंग के औपचारिक रूप से बंटने की संभावना के बीच, अब सबकी नज़रें स्पीकर के कार्यालय और चुनाव आयोग पर होंगी, जिनके फ़ैसले भारत की सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय पार्टियों में से एक का भविष्य तय कर सकते हैं।

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