राष्ट्रपति भवन की ओर से इंडिया टुडे के चेयरमैन को गई चिट्ठी, राजदीप प्रकरण को लेकर कही ये बड़ी बात

राष्ट्रपति भवन की ओर से इंडिया टुडे के चेयरमैन को गई चिट्ठी, राजदीप प्रकरण को लेकर कही ये बड़ी बात

इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई की तरफ से भी ऐसी ही दावे सोशल मीडिया पर किए गए। लेकिन निराशाजनक बात है कि पत्रकार ने इससे जुड़े तथ्यों की जांच-परख करना भी जरूरी नहीं समझा। न ही नेताजी के परिवार के किसी सदस्य से इस संबंध में बात करना जरूरी समझा।

पिछले दिनों एक अभियान चलाया गया कुछ कथाकथित पत्रकारों द्वारा और देश के राष्ट्रपति से अपील भी की गई। मामला था नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर राष्ट्रपति भवन में उनकी तस्वीर के अनावरण को लेकर, जिसमें दावा किया गया कि जिस तस्वीर का अनावरण किया गया है वह असल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर है ही नहीं बल्कि ये तो एक्टर प्रसनजीत चटर्जी की है। ये अफवाह फैलाने वालों में इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई, सागरिका घोष, बरखा दत्त सरीखे कुछ पत्रकार ट्वीटर पर ऐसे दावे करने लगे। लेकिन सारे मामले को नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने खारिज करते हुए प्रोपोगेंडा फैलाने वालों को जमकर लताड़ भी लगाई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा अनावरण किए गए तस्वीर को पद्मश्री से सम्मानित परेश मैती ने नेताजी की असली तस्वीर को देखकर बनाई है। नए पोट्रेट पर परेश मैती के हस्ताक्षर भी हैं। 

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पत्रकार राजदीप ने नेताजी की फोटो को अभिनेता प्रसेनजीत की तस्वीर बताते हुए राष्ट्रपति भवन से असली चित्र लगाने की मांग कर डाली। हालांकि नेताजी के पोते की तरफ से दावे का खंडन करने के बाद राजदीप सरदेसाई की ओर से पोस्ट तो डिलीट कर दिया लेकिन अपनी भूल के लिए देश के राष्ट्रपति से माफी मांगना भी उचित नहीं समझा। लेकिन अब इस मामले को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रपति भवन की ओर से इंडिया टुडे के चेयरमैन अरुण पुरी को पत्र लिखा है।  राष्ट्रपति भवन के प्रेस सचिव ने सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन भ्रमित खबर चलाने की बात पत्र में लिखी है। पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्वारा नेताजी की जयंती पर उनकी तस्वीर के अनावरण को लेकर पत्रकारों के एक समूह वर्ग द्वारा भ्रामक जानकारी फैलाई गई कि ये तस्वीर नेताजी नहीं बल्कि प्रसनजीत चटर्जी की है। इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई की तरफ से भी ऐसी ही दावे सोशल मीडिया पर किए गए। लेकिन निराशाजनक बात है कि पत्रकार ने इससे जुड़े तथ्यों की जांच-परख करना भी जरूरी नहीं समझा। न ही नेताजी के परिवार के किसी सदस्य से इस संबंध में बात करना जरूरी समझा। राष्ट्रपति भवन की ओर से कड़े शब्दों में इस तरह की हरकत के लिए निंदा की गई औऱ भविष्य में इंडिया टुडे समूह के साथ अनुबंध की समीक्षा की बात कही गई।  





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