जन्मदिन के बाद आंदोलन स्थल पर बरसी कार्यक्रम की भी हुई शुरुआत, गांवों से आए रिश्तेदार

जन्मदिन के बाद आंदोलन स्थल पर बरसी कार्यक्रम की भी हुई शुरुआत, गांवों से आए रिश्तेदार
प्रतिरूप फोटो

पिछले दिसंबर माह से किसानों ने जन्मदिन मनाना शुरू कर दिया था। साल 2021 की शुरुआत के साथ ही जन्मदिन पर केक काटने की भी परंपरा को शुरू किया गया। दरअसल, किसान अपने पोते, पोतियों, बच्चों और परिजनों के जन्मदिन पर सबसे पहले टेंट को सजाते हैं।

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन पिछले आठ महीने से जारी है। लेकिन आंदोलन कब समाप्त होगा ? इसकी दूर-दूर तक कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल आंदोलन स्थलों पर किसान अपने बेटे, पोते, पोतियों और परिजनों का जन्मदिन तो मना ही रहे थे कि अब उन्होंने बरसी मनाना भी शुरू कर दिया है। 

इसे भी पढ़ें: दिल्ली गेट पर राकेश टिकैत करते रहे इंतजार, बिना मिले ही बंगाल लौट गईं ममता बनर्जी 

आपको बता दें कि पिछले दिसंबर माह से किसानों ने जन्मदिन मनाना शुरू कर दिया था। साल 2021 की शुरुआत के साथ ही जन्मदिन पर केक काटने की भी परंपरा को शुरू किया गया। दरअसल, किसान अपने पोते, पोतियों, बच्चों और परिजनों के जन्मदिन पर सबसे पहले टेंट को सजाते हैं और फिर शानदान तरीके से जन्मदिन का आयोजन करते हैं। किसान टेंट को सजाने के लिए फूल और गुब्बारे का इस्तेमाल करते हैं। जन्मदिन के अवसर पर गांव से किसानों का परिवार भी आंदोलनस्थल पर पहुंचता है, जहां पर धूमधाम से कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

आंदोलनस्थल पर पहले जन्मदिन ही मनाया जा रहा था लेकिन अब बरसी मनाने की परंपरा भी शुरू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के सहयोगी रहे चौधरी बृजपाल सिंह की शुक्रवार को यूपी गेट के आंदोलनस्थल पर बरसी मनाई गई। इस दौरान पूरे विधि-विधान के साथ पूजा और हवन हुआ। बरसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गांव से महिलाएं और रिश्तेदार भी यूपी गेट पहुंचे। जहां पर दावत नामा का भी आयोजन हुआ। 

इसे भी पढ़ें: किसानों ने भाजपा नेता कैलाश मेघवाल के फाडे कपड़े, पुलिसवालों ने सुरक्षित निकाला 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी इस साल अपने दो पोतो का जन्मदिन आंदोलनस्थल पर ही मनाया। गौरतलब है कि किसान केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उनकी सरकार से मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कानून बनाया जाए। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया था कि वह कानूनों को वापस नहीं लेने वाली है लेकिन जरूरी संशोधन करने के लिए तैयार है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।

Prabhasakshi logoखबरें और भी हैं...

राष्ट्रीय

झरोखे से...