Prabhasakshi NewsRoom: Agnipath Scheme में हुए बदलाव का Uttar Pradesh, Punjab, Uttarakhand Assembly Elections पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर प्रदेश की बात करें तो आपको बता दें कि आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा यह राज्य मोदी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा राजनीतिक लाभार्थी बन सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल और अवध तक सेना में जाने की परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार ने अग्निवीरों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अग्निवीरों की चार साल की सेवा अवधि के बाद दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल देने का निर्णय किया है। इतना ही नहीं, इसके बाद उन्हें नियमित सैनिक बनने का अवसर भी मिलेगा। इस फैसले को अग्निपथ योजना को लेकर उठ रहे सवालों और चार साल बाद युवाओं के भविष्य की चिंता के संदर्भ में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में, जहां सेना में भर्ती होना हजारों युवाओं का सपना और गांव-गांव की सैन्य परंपरा का हिस्सा है, वहां सरकार के इस फैसले का असर केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
इस फैसले की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से ही चार साल की सेवा और उसके बाद भविष्य की अनिश्चितता को लेकर सवाल उठते रहे थे। सरकार ने अब उसी चिंता का समाधान निकाला है। हम आपको बता दें कि पहले चार साल बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रावधान था, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से बाहर होना पड़ता। अब इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर मिलेगा। इसके बाद उनकी इच्छा और निर्धारित चयन मानकों पर खरा उतरने के आधार पर नियमित सैनिक बनने का रास्ता भी खुलेगा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस दूसरे कार्यकाल में अधिक वेतन, बेहतर सेवा निधि और वरिष्ठता से जुड़े लाभ भी दिए जाएंगे।
मोदी सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ये तीनों राज्य सेना में युवाओं की भागीदारी और सैन्य परंपरा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अग्निवीरों को लेकर लिया गया यह निर्णय राजनीतिक रूप से भी भाजपा और एनडीए के लिए बड़ा संदेश बन सकता है।
उत्तर प्रदेश: सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश गांवों और सैन्य परिवारों तक
उत्तर प्रदेश की बात करें तो आपको बता दें कि आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा यह राज्य मोदी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा राजनीतिक लाभार्थी बन सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल और अवध तक सेना में जाने की परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। गांवों में सेना की नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का माध्यम भी रही है। यही वजह है कि अग्निपथ योजना को लेकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चार साल बाद सेवा समाप्त होने का सवाल राजनीतिक बहस का विषय बना था। खासकर उन परिवारों में, जहां पिता या दादा सेना में रह चुके हैं और अगली पीढ़ी भी वर्दी पहनने का सपना देखती है।
अब मोदी सरकार के फैसले से ऐसे परिवारों को यह संदेश दिया जा सकता है कि उनके बच्चों का सेना से जुड़ाव केवल चार साल तक सीमित नहीं रहेगा। दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल और उसके बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर युवाओं के सामने सेना में कॅरियर को आगे बढ़ाने की नई संभावना लेकर आया है।
भाजपा के लिए इसका राजनीतिक महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं। यहां युवाओं, ग्रामीण मतदाताओं और सैन्य परिवारों के बीच इस फैसले को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा सकती है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहां सेना में भर्ती की परंपरा मजबूत रही है, वहां यह मुद्दा चुनावी विमर्श में जगह बना सकता है।
उत्तराखंड: सैन्य परंपरा वाले राज्य में सीधा असर
उत्तराखंड की बात करें तो यहां सेना और सैनिक परिवारों का रिश्ता सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। पहाड़ के अनेक गांवों में शायद ही कोई ऐसा परिवार मिले, जिसका सेना से किसी न किसी रूप में संबंध न रहा हो। गढ़वाल और कुमाऊं की सैन्य परंपरा देशभर में पहचानी जाती है। ऐसे राज्य में अग्निवीरों के लिए दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है। इसका सीधा संबंध उन परिवारों की उम्मीदों से है, जिनके लिए सेना में नौकरी पीढ़ियों से आजीविका और सम्मान का बड़ा आधार रही है।
उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने अगले विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने की चुनौती होगी। ऐसे में केंद्र का यह फैसला राज्य सरकार के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। सैन्य परिवारों के बीच यह संदेश पहुंचाना आसान होगा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया और अग्निवीरों के लिए सेना में आगे बढ़ने का रास्ता खोला है।
पंजाब: जहां फौज में जाना युवाओं का सपना है
साथ ही पंजाब में अग्निवीरों को लेकर सरकार का फैसला और भी महत्वपूर्ण राजनीतिक अर्थ रखता है। पंजाब के अनेक गांवों में सेना में भर्ती होना युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ गौरव का विषय रहा है। मालवा, माझा और दोआबा के इलाकों में सैन्य सेवा की मजबूत परंपरा रही है। यहां अग्निपथ योजना को लेकर चार साल की सेवा के बाद भविष्य का सवाल स्वाभाविक रूप से राजनीतिक मुद्दा बन सकता था। अब दो साल के विस्तार और नियमित सेवा में शामिल होने के अवसर से उस सवाल का नया जवाब सरकार के पास है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और 117 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में 2027 का चुनाव भाजपा के लिए भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर होगा। भाजपा इस फैसले को केंद्र सरकार की युवा और सैनिक परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता के तौर पर पेश कर सकती है। खासकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वाले युवाओं और उनके परिवारों की संख्या बड़ी है।
राष्ट्रीय स्तर पर अग्निवीरों के लिए नया रास्ता
इसके अलावा, इस फैसले का असर केवल इन तीन चुनावी राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा। देशभर में सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। हम आपको याद दिला दें कि अग्निपथ योजना 14 जून 2022 को शुरू हुई थी। इसके तहत चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान था। शेष 75 प्रतिशत को सेवा निधि पैकेज के साथ वापस लौटना था। उनके लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में आरक्षण तथा रोजगार के अवसर भी घोषित किए गए थे।
लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल रोजगार के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराना नहीं थी। चुनौती उस मानसिकता और सामाजिक अपेक्षा से जुड़ी थी, जिसमें सेना की नौकरी को जीवनभर की स्थायी सेवा और आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता है।
देखा जाये तो ग्रामीण भारत में एक युवा जब सेना में भर्ती होता है तो उसके पीछे पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। परिवार चाहता है कि बेटा सेना में जाए, नियमित वेतन पाए, लंबे समय तक सेवा करे और सेवानिवृत्ति के बाद भी आर्थिक सुरक्षा हासिल करे। चार साल की अवधि इस पारंपरिक सोच से मेल नहीं खाती थी। मोदी सरकार ने दूसरे रोजगार के रास्ते खोले, लेकिन स्थायी सैन्य सेवा की चाह पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अब इसी मोर्चे पर सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पहले चार साल में चयनित 25 प्रतिशत अग्निवीर नियमित सेवा में शामिल होंगे। बाकी 75 प्रतिशत को दो साल का दूसरा सेवा कार्यकाल दिया जाएगा। इस दौरान बेहतर वेतन, बढ़ी हुई सेवा निधि और वरिष्ठता से जुड़े लाभ मिलेंगे। इसके बाद इच्छुक अग्निवीरों को निर्धारित चयन मानकों के आधार पर नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा।
हम आपको बता दें कि पहली अग्निवीर भर्ती के लगभग 18,300 जवानों के दिसंबर 2026 तक चार साल पूरे होने वाले थे। ऐसे समय में आया यह फैसला उन युवाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जिनके सामने कुछ ही सप्ताह में सेवा समाप्त होने की स्थिति आने वाली थी।
चुनावी राजनीति में मोदी सरकार का बड़ा दांव
साथ ही इस पूरे फैसले का राजनीतिक पहलू समझना जरूरी है। फरवरी-मार्च 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। निर्वाचन आयोग ने अभी चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है, लेकिन इन राज्यों में चुनावी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में अग्निवीर योजना में बदलाव भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हथियार बन सकता है। विपक्ष ने अग्निपथ योजना को लेकर लगातार सवाल उठाए थे। चार साल बाद 75 प्रतिशत युवाओं के सेना से बाहर होने की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी। अब सरकार के पास उन सवालों का जवाब देने के लिए एक नया फैसला है।
भाजपा इस बदलाव को इस रूप में पेश कर सकती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने युवाओं की आकांक्षाओं और सेना के अनुभवों के आधार पर योजना में बदलाव किया। सरकार ने अग्निपथ योजना को खत्म नहीं किया, बल्कि उसके भीतर ही ऐसा रास्ता तैयार किया है, जिससे ज्यादा अग्निवीरों को लंबे समय तक सेना से जुड़े रहने और नियमित सैनिक बनने का अवसर मिल सके।
साथ ही इसका सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश उन गांवों तक पहुंच सकता है, जहां सेना में भर्ती होना आज भी युवाओं का सबसे बड़ा सपना है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाकों से लेकर उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों और पंजाब के सैन्य परंपरा वाले क्षेत्रों तक इस फैसले को भाजपा अपनी युवा-केंद्रित और सैनिक परिवारों के हित में उठाए गए कदम के तौर पर प्रचारित कर सकती है।
बहरहाल, अग्निवीरों को दो साल का एक्सटेंशन देकर मोदी सरकार ने केवल सेवा अवधि नहीं बढ़ाई है, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले एक ऐसे वर्ग की चिंता को संबोधित किया है, जिसकी नाराजगी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती थी। अब भाजपा के सामने इस फैसले को गांव-गांव, युवा-युवा और सैन्य परिवारों तक पहुंचाने का अवसर है। जिस अग्निपथ योजना को विपक्ष ने राजनीतिक घेराबंदी का मुद्दा बनाया था, उसी योजना में बदलाव करके सरकार ने चुनावी बहस की दिशा बदलने की कोशिश की है।
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