अलविदा अजीत पवार! महाराष्ट्र का 'दादा' मौन, बारामती की मिट्टी से शुरू हुआ सफर, उसी मिट्टी में खत्म

Ajit Pawar
ANI
रेनू तिवारी । Jan 28 2026 11:13AM

अजीत पवार जिला परिषद चुनावों से पहले चार जनसभाओं को संबोधित करने के लिए बारामती जा रहे थे, तभी मुंबई से चार्टर्ड किया गया Learjet 45 विमान क्रैश हो गया। पूरा विमान जलकर राख हो गया, विजुअल्स में यह पूरी तरह से टूटा हुआ और मलबा चारों ओर बिखरा हुआ दिख रहा था।

महाराष्ट्र की राजनीति के 'पावर हाउस' और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का बुधवार को बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। 66 वर्ष की आयु में उनका इस तरह जाना न केवल एक परिवार का अंत है, बल्कि उस राजनीतिक शैली का भी अंत है जहाँ निर्णय सेकंडों में लिए जाते थे और अनुशासन ही सर्वोपरि था।

अजीत पवार जिला परिषद चुनावों से पहले चार जनसभाओं को संबोधित करने के लिए बारामती जा रहे थे, तभी मुंबई से चार्टर्ड किया गया Learjet 45 विमान क्रैश हो गया। पूरा विमान जलकर राख हो गया, विजुअल्स में यह पूरी तरह से टूटा हुआ और मलबा चारों ओर बिखरा हुआ दिख रहा था। शुरुआती विजुअल्स में बारामती में उस इलाके से भारी आग और धुआं निकलता दिख रहा था। पवार ने मंगलवार को मुंबई में कैबिनेट मीटिंग में हिस्सा लिया था और पुणे में आने वाले नगर निगम चुनावों से संबंधित कई मीटिंग्स के लिए बारामती जा रहे थे।

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शुरुआत: विरासत और संघर्ष का संगम

22 जुलाई 1959 को जन्मे अजीत पवार के जीवन में मोड़ तब आया जब 18 साल की उम्र में उनके पिता अनंतराव पवार का निधन हो गया। यहाँ से उनके चाचा शरद पवार उनके मार्गदर्शक बने। 1982 में एक चीनी सहकारी समिति से शुरू हुआ उनका सफर 1991 में बारामती लोकसभा सीट तक पहुँचा। हालांकि, चाचा के लिए सीट खाली कर वे राज्य की राजनीति में लौटे और फिर अगले तीन दशकों तक बारामती विधानसभा के निर्विवाद राजा बने रहे। 

उनके शुरुआती साल उन सहकारी संस्थानों के आसपास बीते, जिन्होंने पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति को आकार दिया है। यहीं पर उन्होंने अपने पहले नेटवर्क बनाए, प्रमुख राजनीतिक पद संभालने से बहुत पहले चीनी मिलों, दूध संघों और स्थानीय बैंकों के साथ काम किया। 1991 में, वह पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16 साल तक इस पद पर रहे।

पवार का पहला चुनावी मुकाबला भी 1991 में हुआ, जब उन्हें बारामती से लोकसभा के लिए चुना गया। नरसिम्हा राव सरकार में शरद पवार के रक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने यह सीट खाली कर दी और राज्य की राजनीति में आ गए, उसी साल बारामती विधानसभा सीट जीती। यह वह सीट थी जिसका उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक लगातार प्रतिनिधित्व किया। नवंबर 2024 में, उन्होंने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से आठवीं बार यह सीट जीती। वहां से, पवार की तरक्की लगातार जारी रही। वह अपनी प्रशासनिक दक्षता और राज्य की नीतियों, खासकर वित्त, सिंचाई और ग्रामीण विकास में काफी प्रभाव रखने के लिए जाने गए।

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इन वर्षों में, उन्होंने सिंचाई, जल संसाधन और वित्त सहित कई महत्वपूर्ण विभागों को संभाला, और महाराष्ट्र के बजट बनाने और नौकरशाही निर्णय लेने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उन्होंने कई बार उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और इस भूमिका में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले राजनेताओं में से एक बन गए। उनकी राजनीतिक यात्रा कई महत्वपूर्ण पड़ावों से भरी रही। नवंबर 2019 में, विधानसभा चुनावों और भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच बंटवारे के बाद, उन्हें और देवेंद्र फडणवीस को राजभवन में सुबह-सुबह एक समारोह में क्रमशः उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।

यह सरकार सिर्फ़ 80 घंटे चली, क्योंकि पवार अपने साथ पर्याप्त विधायकों को नहीं ला पाए। जुलाई 2023 में, उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तोड़ दिया और पांचवीं बार उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस कदम ने शरद पवार के साथ उनके सबसे बड़े अलगाव को दिखाया। 5 दिसंबर 2024 तक, उन्होंने मुंबई में एक भव्य समारोह में छठी बार उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कई राजनीतिक जानकारों के लिए, इसने महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली पवार के रूप में उनके उदय को पक्का कर दिया।


राजनीति का 'दादा' अंदाज: न कोई स्थायी दोस्त, न दुश्मन

अजीत पवार की राजनीति की सबसे बड़ी खूबी थी- व्यवहारिकता (Pragmatism)। उन्होंने साबित किया कि राजनीति संभावनाओं का खेल है:

प्रशासनिक दक्षता: उन्हें फाइलों का जादूगर कहा जाता था। सुबह 6 बजे से काम शुरू करने की उनकी आदत ने महाराष्ट्र की नौकरशाही को हमेशा सतर्क रखा।

सहकारी आंदोलन की नींव: पुणे जिला सहकारी बैंक और चीनी मिलों के माध्यम से उन्होंने जमीनी स्तर पर ऐसा नेटवर्क बनाया जो उनके बुरे वक्त में भी उनके साथ खड़ा रहा।

अविचल बारामती: नवंबर 2024 में आठवीं बार एक लाख से अधिक वोटों से मिली जीत उनके प्रति जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण थी।

बगावत और सत्ता का शिखर

अजीत पवार का करियर केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि साहसी और विवादित फैसलों से भी भरा रहा:

2019 का 'भोर' शपथ ग्रहण: देवेंद्र फडणवीस के साथ सुबह-सुबह उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेना भारतीय राजनीति के सबसे चौंकाने वाले घटनाक्रमों में से एक था।

2023 का बड़ा फैसला: अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर NCP को दो हिस्सों में बांटना और सत्ता में शामिल होना उनके राजनीतिक स्वाभिमान की सबसे बड़ी लड़ाई थी।

छठी बार उपमुख्यमंत्री: 5 दिसंबर 2024 को छठी बार इस पद की शपथ लेकर उन्होंने दिखा दिया कि महाराष्ट्र की सत्ता का समीकरण उनके बिना अधूरा है।

"काम बोलता है": अजीत पवार अक्सर कहते थे कि उन्हें भाषणबाजी से ज्यादा काम करने में दिलचस्पी है। बारामती का आधुनिक बुनियादी ढांचा उनके इसी विजन की गवाही देता है।

एक युग का अवसान

बुधवार की सुबह जब उनका Learjet 45 विमान बारामती के रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ, तो महाराष्ट्र ने एक ऐसा नेता खो दिया जिसने गठबंधन की राजनीति के दौर में भी अपनी शर्तों पर काम किया। उनके पीछे उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और दो बेटे, पार्थ और जय पवार हैं।

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