MBBS दाखिले में SC Reservation: Allahabad HC ने UP सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से 2026-27 के एमबीबीएस दाखिलों में अनुसूचित जाति आरक्षण लागू करने पर जवाब मांगा है। अदालत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। याचिका में आरोप है कि आरक्षण का लाभ सभी मेडिकल कॉलेजों के बजाय केवल चार कॉलेजों तक सीमित रखा गया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस काउंसलिंग में अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण से जुड़े उसके पिछले आदेश को किस तरह लागू किया गया। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अदालत के आदेश के अनुपालन की स्थिति और राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बारे में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने यह आदेश ‘यूथ फॉर इक्वेलिटी फाउंडेशन’ की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने एससी आरक्षण से जुड़े अदालत के आदेश को सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में लागू नहीं किया, बल्कि इसे केवल चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक सीमित रखा। अदालत ने मामले को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ 29 सितंबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। यह विवाद चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों-अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर-में अनुसूचित जाति आरक्षण से जुड़ा है।
इससे पहले एक विशेष अपील में राज्य सरकार ने अदालत से आग्रह किया था कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 की काउंसलिंग प्रक्रिया को प्रभावित न किया जाए। सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन चारों कॉलेजों में एससी आरक्षण को कानून के तहत निर्धारित 21 प्रतिशत सीमा के अनुसार लागू किया जाएगा। इस आश्वासन के आधार पर अदालत ने उस समय चल रही दाखिला प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया था।
इसके बाद एक अन्य रिट याचिका में 16 सितंबर को पारित आदेश के अनुपालन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। सोमवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि राज्य सरकार ने अदालत के आदेश को सभी कॉलेजों और सभी सीटों की पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया में लागू नहीं किया, बल्कि इसका दायरा केवल उन चार कॉलेजों तक सीमित रखा, जो रिट याचिका से जुड़े थे। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यह अदालत के पूर्व आदेश और विशेष अपील में राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन का अनुपालन नहीं है।
दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
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