कारगिल युद्ध में अटलजी ने निभाया था अहम रोल, शरीफ को भी लताड़ा था

26 जुलाई 1999 का दिन भारतीय इतिहास में कभी भुलाया नहीं जा सकता है क्योंकि, इस दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की थी।
नयी दिल्ली। 26 जुलाई 1999 का दिन भारतीय इतिहास में कभी भुलाया नहीं जा सकता है क्योंकि, इस दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की थी। हालांकि, इस युद्ध में 527 जवानों को हमने खो दिया था लेकिन, मरते दम तक भारत के वीर जवानों ने दुश्मनों को अपनी धरती से खदेड़ दिया था।
कारगिल युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीजी ने जिस तरह से जवानों की हौसला अफजाई और कूटनीति का परिचय दिया वह काबिल-ए-तारीफ था। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से बातचीत की और उन्हें जमकर लताड़ा था कि एक तरफ तो आप मुझे लाहौर बुलाकर स्वागत करते हो और दूसरी तरफ युद्ध छेड़ दिया, यह बेहद बुरा है।
इसके बाद उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि फिलहाल हमारा नियंत्रण रेखा को पार करके जाने का कोई इरादा नहीं है। हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं और पाकिस्तान की सेना बाहर जा रही है। नवाज साहब मुझसे मिले थे मैंने उनसे कहा जब तक पाकिस्तान कारगिल की उस भूमि को पूरी तरह से खाली करके नहीं जाता हम बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। इसी के साथ अटलजी ने कहा था कि हम हर एक परिस्थित के लिए तैयार हैं।
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कारगिल से जुड़े हुए किस्से का जिक्र मीडिया के समक्ष करते हुए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने बताया था कि कुछ न कुछ नवाज शरीफ को इस युद्ध के बारे में जरूर पता था क्योंकि जब हमें पता चला था कि इसमें मुजाहिद्दीन का हाथ नहीं है, यह पाक के सैनिक हैं। हमने परवेज मुशर्रफ और उनके कमांडर के बीच जो बातचीत हुई उसे पकड़ लिया था।
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