बाबा के रामबाण इलाज पर मंत्रालय की रोक! बिना अप्रूवल प्रचार और ब्रांडिंग के फेर में हो गई किरकिरी

बाबा के रामबाण इलाज पर मंत्रालय की रोक! बिना अप्रूवल प्रचार और ब्रांडिंग के फेर में हो गई किरकिरी

क्या वाकई अब कोरोना से किसी की मौत नहीं होगी। अगर वो पतंजलि वाली दवा खा लेंगे। यदि ऐसा है तो दुनियाभर के वैज्ञानिक जो महीनों से कोरोना की दवाई बनाने में जुटे थे, उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आ रही।

देश में जिस वक्त कोरोना वायरस की महामारी अपने पैर पसार रही है और हर रोज़ पंद्रह हज़ार केस सामने आ रहे हैं, ऐसे वक्त में एक और बहस छिड़ गई है. मंगलवार को योगगुरु रामदेव ने कोरोना को मात देने वाली दवाई ‘कोरोनिल’ को लॉन्च किया, रामदेव ने दावा किया कि ये दवाई कोरोना को मात देती है और इसका रिजल्ट सौ फीसदी है. लेकिन शाम होते-होते आयुष मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए इस दवाई के प्रचार पर रोक लगा दी और पतंजलि से पूरी जानकारी मांगी. यानी मंत्रालय ने अभी दवाई को मंजूरी नहीं दी है।

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देश-दुनिया कोरोना से परेशान है और ये बीमारी बिन बुलाए मेहमान की तरह जाने का नाम नहीं ले रही है और महामारी बनकर सिर पर सवार है। इसकी रफ्तार का आलम ये है कि अब हर रोज लगभग पंद्रह हजार लोग चपेट में आकर संक्रमित हो रहे हैं। कोरोना वायरस की बढ़ती रफ्तार और चीख पुकार के बीच कहीं से भी राहत की खबर नज़र नहीं आ रही है। दुनिया के लगभग सभी देश इस होड़ में लगे हुए हैं कि वह कितने कम समय में कोरोना वायरस की दवा या वैक्सीन को ढ़ूंढ़ निकालें। अब तक कई परीक्षण भी हो चुके हैं लेकिन इसका इंतज़ार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। भारत में भी कई कंपनियां कोरोना वायरस के इलाज और इसकी दवाईयों को लेकर महीनों से खोज रही है। वहीं योगगुरू बाबा  ने जो दावा किया है उसने पूरे विश्व को चौंका दिया है। दरअसल, मंगलवार को योगगुरु रामदेव ने कोरोना को मात देने वाली दवाई ‘कोरोनिल’ को लॉन्च किया, रामदेव ने दावा किया कि ये दवाई कोरोना को मात देती है और इसका रिजल्ट सौ फीसदी है। लेकिन शाम होते-होते आयुष मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए इस दवाई के प्रचार पर रोक लगा दी और पतंजलि से पूरी जानकारी मांगी। जबकि, आईसीएमआर की तरफ से इस दवा की उपयोगिता के बारे में कोई टिप्पणी नहीं आई है जिसका सभी को इंतज़ार है। 

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क्या वाकई कमाल हो गया

क्या वाकई अब कोरोना से किसी की मौत नहीं होगी। अगर वो पतंजलि वाली दवा खा लेंगे। यदि ऐसा है तो दुनियाभर के वैज्ञानिक जो महीनों से कोरोना की दवाई बनाने में जुटे थे, उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आ रही। बाबा रामदेव ने कोरोनील गिलोय, तुलसी और अश्वगंधा से बनी दवा को लेकर कोरोना को सौ फीसदी ठीक करने का दावा कर रहे हैं। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इन चीजों का सेवन पहले से ही बताया जा रहा था। बाबा रामदेव ने भी 8 अप्रैल को पतंजलि के यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो डाला था जिसमें वो इन चीजों के सेवन के लिए कह रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि जो चीजें इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बताई जा रही थी, उसे कोरोना की दवाई कह कर प्रचार के साथ बेचना सही है?

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आयुष मंत्रालय की सख्ती

केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि रामदेव को अपनी दवा की घोषणा मंत्रालय से इजाजत लिए बिना नहीं करनी चाहिए थी। उन्‍होंने कहा, 'हमने उनसे जवाब मांगा है।

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि से दावों पर मांगी जानकारी 

  • कोरोनिल दवा में इस्तेमाल किए गए तत्वों का विवरण दें
  • जहां दवा पर अध्ययन किया गया है उस जगह का नाम, हॉस्पिटल का नाम, प्रोटोकॉल, सैंपल साइज की भी डिटेल मांगी है। 

इम्युनिटू बढ़ाने और वायरस को खत्म करने में अंतर 

डब्ल्यूएचओ की एक चेतावनी आई थी। जिसमें एम्युनिटी बढ़ाने की दवाओं को मेडिकल ट्रीटमेंट न बनाने की बात कही थी। 

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ग्लेन फार्मा, हेटरो लैब्स और सिप्ला की कोरोना दवा

ग्लेन फार्मा और हेटरो लैब्स और सिप्ला ने कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिवीर का जेनरिक मेडिसिन पेश किया है। जिसे क्रमश: ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन, अमेरिकी दवा नियामक यूएसएफडीए ने कोविड-19 के मरीजों को आपातकालीन स्थिति में देने की स्वीकृति दी है। लेकिन इन सबमें जो बारिक बात ये है कि इन कंपनियों की दवा हल्के लक्षणों वाले मरीजों में ही कारगर होगी। 

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भारत सरकार की आयुष मंत्रालय

नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2014 में हिन्दुस्तान की बागडोर संभालने के छह महीने के भीतर ही देश में मौजूद इलाज के अलग-अलग परंपरागत तरीकों के विस्तार के लिए अलग से आयुष मंत्रालय का गठन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट विस्तार के दौरान गोवा से लोकसभा सांसद श्रीपद यशो नायक को आयुष विभाग में राज्यमंत्री का स्वतंत्र प्रभार दिया।





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