कहो न प्यार है फिल्म से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक ऐसा रहा बाबुल सुप्रियो का सफरनामा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: May 31 2019 8:55AM
कहो न प्यार है फिल्म से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक ऐसा रहा बाबुल सुप्रियो का सफरनामा
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बाबुल सुप्रियो पश्विम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से दोबारा निर्वाचित हुये हैं। सन 1970 में सुनील चंद्रा बरल और सुमित्रा बरल के घर जन्मे बाबुल सुप्रियो बरल को बचपन से ही संगीतमय वातावरण मिला।

कोलकाता। पार्श्वगायकी में सम्मानजनक मुकाम बनाने के बाद राजनीति में उतरे बाबुल सुप्रियो की केंद्रीय मंत्री के रूप में भी पारी सफल रही। नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में गुरुवार को सुप्रियो ने लगातार दूसरी बार केंद्रीय मंत्री के तौर पर शपथ ली। उन्हें राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलायी गयी। सुप्रियो पश्विम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से दोबारा निर्वाचित हुये हैं। सन 1970 में सुनील चंद्रा बरल और सुमित्रा बरल के घर जन्मे बाबुल सुप्रियो बरल को बचपन से ही संगीतमय वातावरण मिला। उनके दादा बनिकनाथ एनसी बरल, प्रसिद्ध बांग्ला गायक एवं संगीतकार थे। 

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सुप्रियो ने 1991 में वाणिज्य में स्नातक किया और थोड़े समय के लिए स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक में भी नौकरी की। 1992 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और संगीत में करियर बनाने के सपने को साकार करने के लिए मुंबई चले गए। यहां उन्होंने कई स्टेज शो में प्रस्तुति के साथ साथ कई बॉलीवुड फिल्मों में गीत गाये। उनके मशहूर गानों में 2000 में आई फिल्म ‘कहो न प्यार है’ का गाना दिल ने दिल को पुकारा बहुत प्रसिद्ध हुआ। एक बार जब वे हवाई जहाज में सफर कर रहे थे तो उनके पास वाली सीट पर योग गुरू रामदेव बैठे थे और उन्होंने सुप्रियो को राजनीति में आने की सलाह दी। रामदेव ने उनसे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने को कहा। इसके बाद जो हुआ उससे देश वाकिफ है। 

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वह 2014 आसनसोल संसदीय सीट से चुनाव लड़े और भारी मतों के अंतर से जीते। उन्हें नगरीय विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। बाद में उन्हें भारी उद्योग मंत्राालय में राज्य मंत्री बनाया गया। हाल ही संपन्न 2019 के चुनाव में उन्होंने आसनसोल संसदीय सीट से जीत हासिल करते हुये तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी मुनमुन सेन को 1,97,637 मतों से हराया।

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