भारत राष्ट्र समिति ने रैली की; नेताओं ने केंद्र से BJP को हटाने का आह्वान किया

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राव ने कहा कि अगर लोकसभा चुनाव के बाद 2024 में केंद्र में ‘बीआरएस प्रस्तावित सरकार’ सत्ता में आती है तो देश भर के किसानों को मुफ्त बिजली मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि बीआरएस के सत्ता में आने पर सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना को समाप्त कर दिया जाएगा।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की पहली विशाल रैली में बुधवार को विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से बेदखल कर केंद्र में सत्ता परिवर्तन का आह्वान किया। अंतरराज्यीय जल और विकास के मुद्दों सहित कई मुद्दों पर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए राव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले साल लोकसभा चुनाव के बाद घर लौट जाएंगे।

राव ने कहा कि अगर लोकसभा चुनाव के बाद 2024 में केंद्र में ‘बीआरएस प्रस्तावित सरकार’ सत्ता में आती है तो देश भर के किसानों को मुफ्त बिजली मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि बीआरएस के सत्ता में आने पर सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना को समाप्त कर दिया जाएगा। राव ने कहा कि तेलंगाना की रायतु बंधु (किसानों के कल्याण के लिए) जैसी योजनाएं पूरे देश में लागू की जानी चाहिए तथा यह उनकी पार्टी का नारा और मांग है।

बीआरएस की रैली में किसानों के कल्याण पर तेलंगाना सरकार की योजनाओं के पक्ष में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए। रैली में राजनीतिक गीत गूंजते रहे, जिसमें मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष चंद्रशेखर राव की सराहना की गई। राव ने कहा, ‘‘मैं सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से कह रहा हूं। आपकी नीति निजीकरण की है। हमारी नीति राष्ट्रीयकरण की है।’’ उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अंतरराज्यीय जल मुद्दों के लिए दोनों पार्टियां जिम्मेदार हैं।

बीआरएस के एक नेता के अनुसार रैली में अनुमानित तौर पर 2 लाख लोगों की भागीदारी देखी गई। कार्यक्रम में राव के बड़े कट-आउट लगाए गए थे। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में टिप्पणी की कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए केवल 400 दिन बचे हैं। यादव ने कहा कि भाजपा नीत सरकार ने अपने दिन गिनने शुरू कर दिए हैं और यह उससे आगे एक दिन भी सत्ता में नहीं टिकेगी। तेलंगाना राष्ट्र समिति द्वारा हाल अपना नाम बदलकर बीआरएस करने के बाद यह पहली बड़ी जनसभा थी।

भाजपा के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन में कई नेताओं को लाकर, बीआरएस ने राष्ट्रीय स्तर पर समान विचारधारा वाले दलों को साथ लाने की दिशा में पहला कदम उठाया है। साथ ही, इससे बीआरएस को राज्य के भीतर भाजपा का और मजबूती से मुकाबला करने में मदद मिलने की उम्मीद है। बैठक में आम आदमी पार्टी (आप) के अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी राजा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन ने भी भाग लिया।

राष्ट्रीय स्तर पर, बीआरएस द्वारा समर्थित राजनीतिक गठजोड़ की रूपरेखा फिलहाल स्पष्ट नहीं है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के लोगों के पास 2024 के आम चुनाव में केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को हटाने का अवसर होगा। उन्होंने कहा, ‘‘अब देश बदलाव चाहता है। लोगों को पता चल गया है कि ये लोग (राजग सरकार) देश को बदलने नहीं आए हैं। वे सिर्फ देश को बर्बाद करने आए हैं। वर्ष 2024 का चुनाव आपके (लोगों) लिए एक अवसर है। दस साल होने जा रहे..आप कब तक इंतजार करेंगे?’’

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर देश के लोकतंत्र की नींव को ‘‘तबाह’’ करने का आरोप लगाते हुए धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए ‘नए प्रतिरोध’ का आह्वान किया। विजयन ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि आज, जन प्रतिरोध की भूमि खम्मम में, हमारे एक नए प्रतिरोध की शुरुआत होगी। उन आदर्शों को सुरक्षित करने के लिए प्रतिरोध होगा, जिनके लिए हम अपने स्वतंत्रता संग्राम में लड़े थे। यह प्रतिरोध हमारी धर्मनिरपेक्षता, हमारे लोकतंत्र और देश की रक्षा के लिए है।’’

भाकपा के महासचिव डी राजा ने कहा कि भाजपा से मुकाबला करने और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे सत्ता से हटाने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक दलों को एक साथ आने की जरूरत है।पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह देश रोजगार चाहता है, युवा बेरोजगार हैं। पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के एक नेता ने पीटीआई-से कहा, ‘‘द्रमुक नेतृत्व का स्पष्ट विचार है कि कांग्रेस के बिना किसी तीसरे मोर्चे के गठन से केवल भाजपा को मदद मिलेगी। अगर कांग्रेस ने इस रैली में भाग लिया होता, तो निश्चित रूप से द्रमुक नेतृत्व इसका हिस्सा बनने पर विचार किया होता।

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