Bihar के 629 स्कूलों में खुलेंगी मिनी मिट्टी जांच लैब, कृषि मंत्री ने दी जानकारी

Bihar के 629 स्कूलों में खुलेंगी मिनी मिट्टी जांच लैब, कृषि मंत्री ने दी जानकारी
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पटना में आयोजित खेत बचाओ अभियान कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य के 38 जिलों के 629 पीएम श्री और राजकीय विद्यालयों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने की घोषणा की। यह पहल वित्त वर्ष 2026-27 में छात्रों को वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की गुणवत्ता समझाने के मकसद से शुरू की जाएगी। राज्य के 160 पीएम श्री उच्च विद्यालयों में पहले ही ऐसी सुविधाएं शुरू की जा चुकी हैं।

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि मिट्टी का स्वस्थ रहना कृषि, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। खेतों की उर्वरता और मिट्टी के प्राकृतिक स्वास्थ्य का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें किसानों और आम लोगों की भागीदारी भी आवश्यक है। खेत बचेंगे, तभी जीवन बचेगा और मिट्टी बचेगी, तभी किसान समृद्ध होंगे।

सिन्हा ने पटना के ज्ञान भवन में आयोजित खेत बचाओ अभियान सह कृषि जन कल्याण संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। कृषि मंत्री ने कहा कि नयी पीढ़ी को मिट्टी संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य के सभी 38 जिलों के 629 पीएम श्री और राजकीय विद्यालयों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इससे विद्यार्थी वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की गुणवत्ता को समझ सकेंगे।

उन्होंने बताया कि राज्य के 160 पीएम श्री उच्च विद्यालयों में पहले ही ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में राज्यभर में आयोजित 7,275 किसान बैठकों में कुल 6,19,436 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 2,12,610 महिला किसान शामिल थीं। रबी मौसम 2026-27 में इस अभियान को सभी 534 प्रखंडों तक पहुंचाने और 15 से 16 लाख किसानों को जागरूक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मंत्री ने कहा कि देशव्यापी खेत बचाओ अभियान की शुरुआत 22 अक्टूबर को हुई है। बिहार में इसे जनभागीदारी के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा।

इस कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री और विभागीय अधिकारियों ने किसानों से सीधा संवाद कर विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस दौरान फार्मर आईडी, डिजिटल क्रॉप सर्वे और कृषि यांत्रीकरण सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई।

उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार लाने और किसानों को समय पर उनका लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में खेतों और मिट्टी की उर्वरता को बचाना एक बड़ी चुनौती बन गई है। बिहार में वर्ष 2005 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनने के बाद वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि रोड मैप लागू किया गया था।

इसके तहत विभिन्न विभागों को जोड़कर कृषि क्षेत्र के समग्र विकास का प्रयास किया गया, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि खेतों की उर्वरता बनाए रखना, मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारना और खेती की लागत कम करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने और खेत बचाओ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयास तभी सफल होंगे, जब किसान और आम लोग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। वहीं, लघु जल संसाधन विभाग के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि किसान जन कल्याण संवाद के माध्यम से किसानों की समस्याओं की जानकारी लेकर उनका तकनीकी एवं व्यावहारिक समाधान किया जाएगा, ताकि कृषि उत्पादन और उसकी गुणवत्ता में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना उनके विभाग का प्रमुख दायित्व है।

सिंचाई के बिना हरियाली और कृषि का विकास संभव नहीं है। खेतों की उर्वरता और स्वास्थ्य बेहतर बनाने तथा कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया।

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