बीरभूम हिंसा: बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सौंपी रिपोर्ट, बौखलाई ममता ने कहा- CBI जांच होगी प्रभावित

बीरभूम हिंसा: बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सौंपी रिपोर्ट, बौखलाई ममता ने कहा- CBI जांच होगी प्रभावित

बीजेपी की रिपोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार बोगटुई की जांच में सीबीआई का सहयोग कर रही है। बीजेपी अपनी रिपोर्ट से जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

बीरभूम हिंसा मामले में बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने जेपी नड्डा को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस रिपोर्ट ने खासा नाराज नजर आ रही हैं। उन्होंने दार्जिलिंग में इस रिपोर्ट को लेकर बीजेपी की तीखी आलोचना की है। ममता को डर है कि बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट से जांच प्रभावित होगी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बीरभूम हत्या पर भाजपा की रिपोर्ट सीबीआई की जांच में दखलअंदाजी होगी। बता दें कि बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, भारती घोष, राज्यसभा सांसद श्री ब्रजलाल, सांसद सत्यपाल सिंह और सांसद श्री केसी राममूर्ति भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा के पास गए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पांच सदस्यीय तथ्य-खोज समिति ने पार्टी प्रमुख को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। 

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बीजेपी की रिपोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार बोगटुई की जांच में सीबीआई का सहयोग कर रही है। बीजेपी अपनी रिपोर्ट से जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। ममता ने इस रिपोर्ट कोप्रतिशोधात्मक बताया है। ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा का व्यवहार बेहद निंदनीय है। मैंने उनकी रिपोर्ट देखी है। उन्होंने बिना किसी जांच के जिला तृणमूल अध्यक्ष का नाम कैसे ले लिया? आप कैसे जानते हैं कि घटना में कौन शामिल है? दरअसल, बीजेपी चाहती है कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए। 

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बता दें कि जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल राज्य भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ब्रजलाल, लोकसभा सांसद और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त सत्य पाल सिंह, राज्यसभा सांसद और पूर्व आईपीएस केसी राममूर्ति सहित पांच सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का गठन किया था। रिपोर्ट में बंगाल में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया गया है। घटना के दिन पुलिसकर्मियों और एसडीपीओ की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। 





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