भाजपा लोकसभा चुनाव जीतने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण कर रही है: तृणमूल नेता रिपुन बोरा

President Ripun Bora
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2024 के लोकसभा चुनाव पर नजर गड़ायी भाजपा लोगों का ध्रुवीकरण करने के लिए ‘एक राष्ट्र, एक धर्म, हिंदू राष्ट्र’ के नारे में लगी हुई है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे भावनात्मक कार्ड से हिंदुओं को लामबंद करना और चुनाव जीतना चाहते हैं क्योंकि उनके पास दिखाने के लिए विकास के काम नहीं हैं।

तृणमूल कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि अगले साल लोकसभा चुनाव में अपनी नैया पार लगाने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ध्रुवीकरण कर भावनाएं भड़का रही है। बोरा ने दर्रांग जिले में बजरंग दल के शिविर में हथियारों के प्रशिक्षण पर शुरुआती चुप्पी को लेकर पुलिस एवं सरकारी मशीनरी पर भी निशाना साधा। इस घटना से राज्य में विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘देश में भाजपा का यही तौर-तरीका है। इस बार यहां बजरंग दल है, लेकिन वे इसे संघ परिवार कहते हैं। वे सभी समान विचारधारा के संगठन हैं।’’

दर्रांग जिले के मंगलादाई शहर में आयोजित इस शिविर का उल्लेख करते हुए बोरा ने कहा, ‘‘वे कहते हैं कि एयरगन का इस्तेमाल आत्मरक्षा के लिये था, लेकिन यह है तो हथियार ही।एक जुलूस निकाला गया जिसमें ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने के नारे लगाये गये तथा इन बंदूकों से हवा में फायरिंग की गयी। पुलिस मूकदर्शक होकर खड़ी रही। परोक्ष रूप से सरकार इसे बढ़ावा दे रही है।’’ सोमवार को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें मंगलादाई के एक विद्यालय में बजरंग दल के सदस्य कथित रूप से हथियारों का प्रशिक्षण देते हुए नजर आ रहे हैं। असम पुलिस ने इस शिविर के आयोजन को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

विपक्षी कांग्रेस एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आयोजकों तथा जिला प्रशासन की भूमिका के खिलाफ जांच की मांग की है। राज्यों की भाजपा सरकारों को निशाने पर लेते हुए राज्यसभा सदस्य बोरा ने कहा, ‘‘ जहां कहीं भी भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार है, चाहे मणिपुर हो या हरियाणा, समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हो गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव पर नजर गड़ायी भाजपा लोगों का ध्रुवीकरण करने के लिए ‘एक राष्ट्र, एक धर्म, हिंदू राष्ट्र’ के नारे में लगी हुई है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे भावनात्मक कार्ड से हिंदुओं को लामबंद करना और चुनाव जीतना चाहते हैं क्योंकि उनके पास दिखाने के लिए विकास के काम नहीं हैं।

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