पंजाब में कांग्रेस की रणनीति बिगाड़ सकती है भाजपा, अमरिंदर और शिअद के साथ गठबंधन को लेकर हो रही बातचीत

पंजाब में कांग्रेस की रणनीति बिगाड़ सकती है भाजपा, अमरिंदर और शिअद के साथ गठबंधन को लेकर हो रही बातचीत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनाव योग्यता और विकास के आधार पर लड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए बहुत बड़ा दिल दिखाकर तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया है। पंजाब में चुनाव विकास के आधार पर होगा। जिसका अच्छा प्रदर्शन होगा, उसकी सरकार बनेगी।

चंडीगड़। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि भाजपा कैप्टन अमरिंदर सिंह और अपने पुराने साथ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत कर रही है। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट 'हिन्दुस्तान टाइम्स' के लीडरशिप समिट के समापन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि भाजपा कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी और शिरोमणि अकाली दल दोनों के साथ बातचीत कर रही है और विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन हो सकता है।

विकास के आधार पर लड़ा जाएगा चुनाव 

उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनाव योग्यता और विकास के आधार पर लड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए बहुत बड़ा दिल दिखाकर तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया है। पंजाब में चुनाव विकास के आधार पर होगा। जिसका अच्छा प्रदर्शन होगा, उसकी सरकार बनेगी।

आपको बता दें कि पंजाब का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कहकर खुद की पार्टी 'पंजाब लोक कांग्रेस' बनाई है। इसके साथ ही उन्होंने कई दफा साफ किया है कि वो भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए उत्सुक हैं। अमरिंदर सिंह ने अपमानित होकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद दिल्ली का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से बंद कमरे में मुलाकात की थी। कहा जाता है कि इसी दौरान दोनों किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा पर आगे बढ़ चुके थे।

गठबंधन पर आलाकमान करेगा फैसला 

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब भाजपा प्रभारी दुषंत गौतम ने बताया कि पार्टी विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और आलाकमान तय करेगा कि अमरिंदर सिंह के साथ जाना है या नहीं। वहीं दूसरी तरफ अमरिंदर सिंह की पार्टी समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के लिए भी तैयार है। कृषि कानूनों की वजह से अमरिंदर और भाजपा के बीच में गठबंधन नहीं हो सकता था क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री ने कृषि कानूनों का कड़ा विरोध किया था। लेकिन कानूनों के वापस हो जाने के बाद अब दोनों के एकजुट होने में कोई समस्या नहीं दिखाई दे रही है।

भाजपा के लिए कैसा था पुराना चुनाव 

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 77 सीटें जीतकर शिअद-भाजपा सरकार को बाहर कर दिया था। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी 20 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। जबकि शिअद को 15 सीटें और भाजपा को 3 सीटें मिली थीं। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा कृषि कानूनों को लाए जाने के बाद शिअद नेता हरसिमरत बादल ने केंद्रीय मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया था और शिअद ने भाजपा के साथ अपने गठबंधन को समाप्त कर दिया था। ऐसे में भाजपा सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद फिर से पुराने दल को साथ लाने की कोशिश कर रही है।





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