Shaurya Path : देश के समक्ष खड़ी रक्षा-सुरक्षा चुनौतियों के बारे में Brigadier DS Tripathi ने रखी अपनी राय

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ANI
आज के विश्व में साइबर चुनौती, रोबोट हमले, ड्रोन हमले आदि भी नई चुनौती के रूप में खड़े हो गये हैं। जिनसे निबटने के लिए सरकार और सुरक्षा बल अलग-अलग तरह से तैयारियां कर रहे हैं। जहां तक सशस्त्र उग्रवादी संगठनों की बात है तो उन पर काफी हद तक लगाम लगायी जा चुकी है।

नमस्कार, प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में आप सभी का स्वागत है। आज के कार्यक्रम में बात करेंगे भारत की आंतरिक और बाह्य रक्षा-सुरक्षा चुनौतियों की। साथ ही बात करेंगे हमारे पड़ोस के हालात के हम पर पड़ने वाले संभावित असर की। इन मुद्दों पर चर्चा के लिए हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे ब्रिगेडियर सेवानिवृत्त श्री डीएस त्रिपाठी जी।

प्रश्न-1. विश्व का जो परिदृश्य है खासकर हमारे पड़ोस का, उसको देखते हुए भारत के समक्ष सुरक्षा की कौन-सी बड़ी चुनौतियां हैं? हम साथ ही यह भी जानना चाहते हैं कि आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों की बात करें तो माओवादियों, नगा-विद्रोहियों समेत पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों पर हम अब तक कितनी लगाम लगा पाये हैं?

उत्तर- वर्तमान में विश्व का जो परिदृश्य है उसमें भारत के समक्ष जो सबसे बड़ी चुनौती है वह चीन की तरफ से खड़ी है। पाकिस्तान से भी चुनौती है। इसके अलावा चीन जिस तरह हमारे पड़ोसियों को भरमा रहा है उससे भी तमाम तरह की नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। साथ ही आज के विश्व में साइबर चुनौती, रोबोट हमले, ड्रोन हमले आदि भी नई चुनौती के रूप में खड़े हो गये हैं। जिनसे निबटने के लिए सरकार और सुरक्षा बल अलग-अलग तरह से तैयारियां कर रहे हैं। जहां तक सशस्त्र उग्रवादी संगठनों की बात है तो उन पर काफी हद तक लगाम लगायी जा चुकी है। पूर्वोत्तर में कई क्षेत्रों से अफ्सपा हटाया जा चुका है जो दर्शाता है कि अब पहले की अपेक्षा यह क्षेत्र शांत है।

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प्रश्न-2. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा है कि हम सबक सीख चुके हैं और भारत के साथ शांति से रहने को तैयार हैं। इसे कैसे देखते हैं आप? इसके अलावा पीओके और गिलगिट बाल्टिस्तान में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन भड़क रहे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि हमें भारत भेजा जाये या इस क्षेत्र को लद्दाख के साथ मिलाया जाये। क्या हम पीओके हासिल करने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं?

उत्तर- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बयान पर ध्यान नहीं देना चाहिए क्योंकि वह कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। वार्ता के नाम पर पाकिस्तान ने हमेशा धोखा देने का काम किया है। वैसे भी शहबाज शरीफ के बयान के ठीक बाद जिस तरह पाकिस्तान विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया वह दर्शाता है कि वह देश भारत विरोध कभी नहीं छोड़ेगा। हमें यह भी देखना चाहिए कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत के साथ शांति से रहने संबंधी बात यूएई के दौरे के दौरान कही क्योंकि वह जानते हैं कि भारत और यूएई के संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं। जहां तक पीओके में बिगड़ते हालात की बात है तो वह पाकिस्तान सरकार की नाकामी है और इसमें कोई दो राय नहीं कि एक दिन वह आयेगा जब हमारे पड़ोसी देश के और टुकड़े होंगे। पीओके के लोग भारत के साथ आना चाह रहे हैं और उनकी यह चाहत अवश्य पूरी होनी ही चाहिए।

प्रश्न-3. चीन के हाथ खींचने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति ने जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज मुहम्मद सईद के रिश्तेदार अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया है। चीन ने क्यों इस प्रस्ताव से हाथ खींचा जबकि पिछली बार उसने इस प्रस्ताव का विरोध किया था? हम यह भी जानना चाहते हैं कि चीन समर्थक माने जाने वाले नेपाली प्रधानमंत्री पुष्प दहल प्रचंड ने कहा है कि वह जल्द ही अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत जाएंगे। क्या ओली के समर्थन से सरकार चला रहे प्रचंड अपना रुख बदल रहे हैं?

उत्तर- पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के नेता अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर से चीन ने रोक हटाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वह वैश्विक स्तर पर अलग-थलग नहीं पड़ना चाहता है। चीन निश्चित रूप से पाकिस्तान की मदद करता है लेकिन कुछ सीमाएं हैं और वहीं तक चीन पाकिस्तान की ओर से अपने हितों के साथ समझौता करेगा। जहां तक बात नेपाल के प्रधानमंत्री के भारत दौरे की है तो भारत और नेपाल में आरम्भ से ही यह चलन है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहला विदेश दौरा एक दूसरे देश का ही करते हैं। प्रचंड भारत के उतने विरोधी नहीं हैं जितने केपी शर्मा ओली हैं। हालांकि अब वह ओली के समर्थन से सरकार चला रहे हैं इसलिए देखना होगा कि वह कितना अपने मन मुताबिक काम कर पाते हैं।

प्रश्न-4. प्रधानमंत्री ने प्रथम बैच के अग्निवीरों को संबोधित करते हुए कहा है कि अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों को चुनौतियों के लिए तैयार करने में ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। इस संवाद के माध्यम से क्या संदेश देने का प्रयास किया गया है?

उत्तर- अग्निवीरों को संबोधित कर प्रधानमंत्री ने बेहद सकारात्मक कार्य किया है। जवान को अपनी नियुक्ति के दौरान ही कमांडरों के साथ प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन मिल जाये इससे अच्छी बात क्या हो सकती है। जहां तक अग्निपथ योजना की आलोचना की बात है तो हमें तीन-चार साल तक इंतजार कर पहले इस योजना के परिणामों पर गौर करना चाहिए उसके बाद कुछ कहना चाहिए।

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प्रश्न-5. ऐसी खबरें हैं चीन जल युद्ध की तैयारी कर रहा है, यह जल यद्ध क्या है और जवाब देने की हमारी तैयारी क्या है?

उत्तर- चीन तिब्बत से भारत तक ब्रह्मपुत्र पर 60000 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाला बांध बनाने की तैयारी कर रहा है। चीन मेडोग पर यह बांध बनाने की तैयारी कर रहा है जोकि अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बहुत नजदीक है। इसीलिए भारत की नजर वहां पर बनी हुई है और हमारी कुछ परियोजनाएं वहां चल रही हैं जो जरूरत पड़ने पर चीन की हर चाल का जवाब देने में सक्षम साबित होंगी।

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