बस और पार्क High Risk Zone नहीं बन सकते, Supreme Court ने Delhi Police से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में चलती बस में नाबालिग से कथित दुष्कर्म सहित अन्य मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। 2012 के निर्भया केस का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जगहों को हाई रिस्क ज़ोन नहीं बनने दिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-NCR इलाके में चलती बस में 16 साल की लड़की के साथ कथित गैंग-रेप का मामला खुद संज्ञान में लिया और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासन की बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकामी को दिखाती हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और कहा कि पार्क, बस और सड़कों जैसी जगहों को "हाई रिस्क ज़ोन" नहीं बनने दिया जा सकता।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने मीडिया की उन खबरों पर ध्यान दिया जिनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नाबालिगों के साथ यौन हिंसा की हालिया कई घटनाओं का ज़िक्र था। कोर्ट ने जिन मामलों का ज़िक्र किया, उनमें लेडी श्रीराम कॉलेज के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित रेप, स्वरूप नगर में एक नाबालिग के साथ कथित गैंग-रेप और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही बस में एक और नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उठाया गया है। आस्था कुंज मामले ने, जिसमें पुलिसकर्मी बनकर आए तीन लोगों ने 17 साल की लड़की के साथ कथित तौर पर गैंग-रेप किया था, इलाके में सुरक्षा और हिफ़ाज़त को लेकर पहले ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया केस से तुलना की
सुनवाई के दौरान, बेंच ने यौन उत्पीड़न के मामलों के बार-बार होने पर दुख जताया और सवाल किया कि क्या 2012 के निर्भया केस से सच में कोई सबक सीखा गया है। कोर्ट ने कहा, "2012 के निर्भया केस से दुखद तुलना किए बिना नहीं रहा जा सकता और यह सोचना पड़ता है कि क्या कोई सबक सीखा गया है। लोगों की सुरक्षा की गारंटी के बावजूद NCR में यौन उत्पीड़न की घटनाएं हो रही हैं। हिंसा से मुक्त और सम्मान के साथ जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।
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चलती बस के अंदर क्या हुआ
केस की जानकारी के मुताबिक, 16 साल की लड़की 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा में नोएडा जाने के लिए एक स्लीपर बस में चढ़ी थी। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने चलती बस में उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद लड़की को पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके के पास छोड़ दिया गया, जो उस जगह से 40 किलोमीटर से ज़्यादा दूर था जहाँ से वह बस में चढ़ी थी।
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