Chamoli tunnel दुर्घटना में 7 कर्मचारियों की मौत, 3 अन्य की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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उत्तराखंड के चमोली जिले में टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में बृहस्पतिवार शाम भूस्खलन के बाद मलबा और पानी भर गया। हादसे के समय सुरंग में कुल 22 कर्मचारी मौजूद थे, जिनमें से 19 को बाहर निकाल लिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य का निरीक्षण किया और घायलों से मुलाकात की।

उत्तराखंड के चमोली जिले में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में पानी एवं मलबा घुसने से सात लोगों की मौत हो गई है तथा तीन लापता लोगों की तलाश जारी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एन. के. जोशी ने बताया कि हादसे के समय सुरंग में कुल 22 कर्मचारी मौजूद थे। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की शुक्रवार सुबह नौ बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, बृहस्पतिवार रात भर चले राहत एवं बचाव अभियान के दौरान सुरंग से 19 लोगों को बाहर निकाला गया जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई और तीन लापता लोगों की तलाश जारी है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान टिहरी गढ़वाल निवासी प्रदीप पंवार (31), चमोली निवासी मुकेश सिंह, उत्तर प्रदेश निवासियों दुर्गा शर्मा, विजय हंसदा और जितेंद्र कुमार तथा छत्तीसगढ़ निवासियों लोकेश्वर एवं भुनेश्वर के रूप में हुई है। लापता लोगों की पहचान झारखंड निवासी लुकास टोपनो तथा छत्तीसगढ़ निवासियों चेतन पोयाम और देवनाथ के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा बृहस्पतिवार शाम करीब सात बजे मायापुर (पीपलकोटी) स्थित परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ। भूस्खलन के कारण सुरंग में पानी और मलबा भर गया था, जिससे वहां काम कर रहे लोग फंस गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, घायलों में शामिल सुनील दीवान, हारबिल गुड़िया, कमड़ा, निरस्तर भिंगरा, विनोद रावना, दीना बेगरा, खेला राम बिसरा, सुबेग सिंह, तिलकराज और पेन सिंह का गोपेश्वर स्थित जिला चिकित्सालय में उपचार किया जा रहा है। इनमें हारबिल गुड़िया, कमड़ा, निरस्तर भिंगरा, विनोद रावना, दीना बेगरा और खेला राम बिसरा झारखंड के, सुबेग सिंह पंजाब के, तिलकराज हिमाचल प्रदेश के तथा सुनील दीवान और पेन सिंह छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। बिहार निवासी रोहित पांडे को बेहतर उपचार के लिए पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल भेजा गया है, जबकि पश्चिम बंगाल निवासी गोविन्दो मंडल को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के दल घायलों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), पुलिस तथा अन्य तकनीकी एवं विशेषज्ञ दल राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हैं। सुरंग में मलबा और पानी भरा होने के कारण अभियान बेहद सावधानी और आपसी समन्वय के साथ चलाया जा रहा है। गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि लगातार हो रही बारिश से बचाव अभियान में कठिनाइयां आ रही हैं, लेकिन उन्हें विश्वास है कि अभियान सफल होगा। उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘जिस स्थान पर मलबा जमा हुआ है, वहां पानी भर गया है और मशीनों की मदद से उसे तेजी से बाहर निकाला जा रहा है। लगातार बारिश होने से अभियान में कुछ चुनौतियां आ रही हैं... हमने अभियान के लिए एक निश्चित क्षेत्र चिह्नित किया है, जहां हर एक वर्ग मीटर की बेहद सावधानी से जांच की जा रही है।’’ इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार घटनास्थल पर पहुंच कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। बाद में उन्होंने चमोली के जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और मृतकों के परिजनों से मिलकर संवेदना प्रकट की। अधिकारियों ने कहा कि धामी ने राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण करने के बाद चमोली के डीएम गौरव कुमार एवं पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार से घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुरंग के अंदर गए बचाव अभियान में जुटीं विभिन्न टीमों से आवश्यक जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बचाव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी उपलब्ध संसाधनों एवं तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभावी उपयोग किया जाए। अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस समेत सभी बचाव टीमों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखते हुए सुरंग में फंसे शेष तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी गौरव कुमार घटनास्थल पर बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश के लिए सभी आवश्यक संसाधनों और तकनीकी सहायता का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस घटना ने नवंबर 2023 में उत्तरकाशी जिले की निर्माणाधीन सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग में हुए हादसे की याद ताजा कर दी। उस समय 12 नवंबर को सुरंग का एक हिस्सा ढहने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से करीब 17 दिन तक व्यापक बचाव अभियान चलाया था। सभी 41 मजदूरों को 28 नवंबर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

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