मध्य प्रदेश में तीन दिसंबर के बाद मौसम में होगा बदलाव, कम हुई हवाओं की रफ्तार, ठंड से मिली राहत

मध्य प्रदेश में तीन दिसंबर के बाद मौसम में होगा बदलाव, कम हुई हवाओं की रफ्तार, ठंड से मिली राहत

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला ने बताया कि एक पश्चिमी विक्षोभ वर्तमान में ईरान पर है। इसके तीन दिसंबर के आसपास उत्तर भारत में पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है।

भोपाल। चक्रवाती तूफान निवार के समाप्त होने से प्रदेश में हवाओं की रफ्तार अब कम हो गई है। उधर, मौसम प्रणाली के प्रदेश और आस पास सक्रिय नहीं रहने से वातावरण शुष्क हो गया है। इससे रात के तापमान में अब और गिरावट होने के आसार बढ़ गए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक हवा का रुख उत्तरी बना रहने से दो-तीन दिन तक ठंड के तेवर तीखे बने रहने की संभावना है। इसके बाद मौसम के मिजाज में एक बार फिर बदलाव होगा और ठंड से कुछ राहत मिलेगी।

 

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वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला ने बताया कि एक पश्चिमी विक्षोभ वर्तमान में ईरान पर है। इसके तीन दिसंबर के आसपास उत्तर भारत में पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके भी दो-तीन दिसंबर को चक्रवाती तूफान में परिवर्तित होकर तमिलनाडु के तट पर पहुंचने की संभावना है। इन दो सिस्टम के कारण हवाओं के रुख में बदलाव होगा। वातावरण में नमी बढ़ेगी। इससे न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इन सिस्टम के कमजोर पड़ने के बाद फिर ठंड की वापसी होगी।

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मौसम विभाग द्वारा भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश में ठंड का दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया गया। अगले चार महीने पश्चिमी मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर-चंबल संभाग व होशंगाबाद जिले में रात का औसत तापमान सामान्य से एक से डेढ़ डिग्री कम रहेगा। दिन का तापमान सामान्य के आसपास रहेगा। ऐसे में इंदौर में रात में ठंडक ज्यादा बढ़ने की संभावना है। 

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वही पूर्वी मध्य प्रदेश में रात के तापमान में सामान्य से डेढ़ से दो डिग्री की गिरावट होगी। अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक रहेगा। इंदौर सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश में इस बार पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा प्रभावित करेगा। ऐसे में इन इलाकों में जनवरी व फरवरी में ओलावृष्टि की गतिविधियां तीन से चार बार हो सकती हैं। पूर्वानुमान के अनुसार प्रशांत महासागर में ला नीना का प्रभाव मध्यम रूप से बना रहेगा। इसके असर से पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा आएंगे और तापमान में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलेगा।





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