गलवान घाटी के बाद अब डेपसांग पर चीन की नजर, बढ़ाई सैनिकों की तैनाती, 2013 में हुई थी घुसपैठ

गलवान घाटी के बाद अब डेपसांग पर चीन की नजर, बढ़ाई सैनिकों की तैनाती, 2013 में हुई थी घुसपैठ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गलवान घाटी के बाद अब चीनी सैनिकों ने डेपसांग में आवाजाही शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि चीन ने यहां पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है।

लद्दाख। भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए बातचीत हो रही है। 22 जून को कोर कमांडर स्तर की बातचीत दोनों सेनाओं के बीच हुई। यह बैठक करीब 11 घंटे तक चली और बैठक खत्म होने के बाद भारतीय सेना की तरफ से एक बयान सामने आया कि बातचीत सकारात्मक रही और भारत ने यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है। सकारात्मक बातचीत के बावजून चीन लगातार विवाद के नए-नए मोर्चे खोलता जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गलवान घाटी के बाद अब चीनी सैनिकों ने डेपसांग में आवाजाही शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि चीन ने यहां पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। आपको बता दें कि डेपसांग इसलिए भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह दौलत बेग ओल्डी के करीब है और यहां पर भारत का एयरस्ट्रिप है। इतना ही नहीं यह दुनिया का सबसे ऊंचा एयरस्ट्रिप है और उत्तर में चीनी सीमा के करीब है। काराकोरम पास भी यहां से लगभग 30 किमी की दूरी पर है। वहीं भारतीय सेना ने भी यहां पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की है। 

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अंग्रेजी अखबार दी इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक डेपसांग में न केवल चीनी जवानों ने तैनाती बढ़ा दी है बल्कि तेजी से दो सड़कों का भी काम शुरू कर दिया है। इन सड़कों को एलएसी से भारत के इलाकों की तरफ बढ़ाई जा रही है ताकि चीनी सेनाओं के लिए आसानी हो। इतना ही नहीं सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि चीनी सेना द्वारा टैंक की भी तैनाती की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गलवान घाटी में ही सिर्फ चीन की नजर नहीं है वह इनके अलावा भी भारत के साथ नए-नए इलाकों को लेकर आपत्ति जताने का प्रयास कर रहा है। एक तरफ चीन-भारत के साथ बातचीत करने का दिखावा कर रहा है तो दूसरी तरफ एलएसी के करीब अपना जमावड़ा बढ़ा रहा है। कहा जा रहा है कि चीन ने एलएसी के पास 15 जगहों पर अपने सैनिकों और उनके साथ हथियारों का जमावड़ा कर रखा है। 

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सैनिकों का पीछे जाना नहीं हुआ शुरू

एक अधिकारी ने बताया कि नियंत्रण रेखा के पास स्थिति तनावपूर्ण है। किसी भी जगह पर नई झड़प नहीं है। गतिरोध वाले इलाकों पर दोनों तरफ से सैनिक डटे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सैनिकों का पीछे जाना अभी शुरू नहीं हुआ है। हालांकि लोकल कमांडर स्तर की बातचीत के बाद सैनिक पीछे हट सकते हैं।

22 जून को कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी और इसके बाद अभी कोई भी लोकल कमांडर स्तर पर बातचीत नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि लोकल कमांडर स्तर की बैठक में यह तय हो सकता है कि कितने सैनिक कहां से और किस वक्त पीछे हटेंगे। इतना ही नहीं यह भी तय किया जाएगा कि सैनिक कितना पीछे जाएंगे। 

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2013 में डेपसांग में हुई थी घुसपैठ

अब चीन ने डेपसांग नाम का नया मोर्चा खोल दिया है और यहां पर सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा दी है। अप्रैल 2013 में भी चीन ने दौलत बेग गोल्डी से 30 किमी दक्षिण में डेपसांग के इलाके में घुसपैठ की थी और अपना टेंट लगाया था। जिसके बाद भारत और चीन के बीच तनाव का माहौल था और बातचीत हुई थी। हालांकि तीन हफ्ते के गतिरोध के बाद चीन पीछे हटा था। उस वक्त देश के रक्षामंत्री रहे एके एंटनी ने कहा कि लद्दाख में चीन की सेना पहले भी घुसपैठ करती थी लेकिन पेट्रोलिंग के लिए आती थी मगर भारत द्वारा विरोध दर्ज कराए जाने के बाद वह वापस चले जाते थे। मगर अब ऐसा नहीं हो रहा है।





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