Noida Engineer Death पर CM Yogi का बड़ा एक्शन, SIT करेगी जांच, 5 दिन में मांगी रिपोर्ट

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दल को पांच दिनों के भीतर जांच पूरी करके मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को भी प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा में तकनीशियन की मौत के मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी का नेतृत्व मेरठ संभागीय आयुक्त करेंगे और इसमें मेरठ जोन के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता शामिल होंगे। दल को पांच दिनों के भीतर जांच पूरी करके मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को भी प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है। 

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नोएडा स्थित सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले से जुड़ी हर जानकारी

27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की ग्रेटर नोएडा में पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से मौत हो गई। दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस द्वारा कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, यह घटना 17 जनवरी की सुबह तड़के हुई, जब घने कोहरे में मेहता की कार अनियंत्रित होकर सेक्टर 150 में निर्माणाधीन इमारत के तहखाने के लिए खोदे गए 20 फीट से अधिक गहरे गड्ढे में गिर गई। जिस गड्ढे में उनकी मृत्यु हुई, वह पानी से भरा हुआ था और ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले एक चौराहे पर नाले के पास स्थित था। प्राधिकरण ने सेक्टर 150 और उसके आसपास के यातायात प्रबंधन से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर उनकी कर्तव्यहीनता के लिए स्पष्टीकरण मांगा है।

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निर्माण स्थलों पर सुरक्षा समीक्षा का आदेश

सीईओ ने संबंधित विभागों से डेवलपर लोटस द्वारा किए गए आवंटन और निर्माण कार्यों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साइट पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का भी आदेश दिया गया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा उपायों की दोबारा जांच करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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