किसान आंदोलन के चलते हाईवे की हालत हुई बदतर, NHAI को लिखना पड़ा पत्र

किसान आंदोलन के चलते हाईवे की हालत हुई बदतर, NHAI को लिखना पड़ा पत्र

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गाजियाबाद के जिला अधिकारी को पत्र लिखकर नेशनल हाईवे खाली कराने की मांग की है। एनएचएआई ने अपने पत्र में लिखा कि नेशनल हाईवे-24 को खाली कराया जाएं ताकि मरम्मत का काम किया जा सके।

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन पिछले 10 महीने से जारी है। नवंबर 2022 के मध्य से किसान अपनी मांगों के साथ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। जिसमें गाजीपुर बॉर्डर भी शामिल है। दरअसल, यह सीमा दिल्ली और उत्तर प्रदेश को जोड़ती है और नेशनल हाईवे-24 गाजियाबाद से होकर गुजरता है। जिसकी हालत अब बदतर हो गई है। 

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NHAI ने जिला अधिकारी को लिखा पत्र

इसी संबंध में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गाजियाबाद के जिला अधिकारी को पत्र लिखकर नेशनल हाईवे खाली कराने की मांग की है। एनएचएआई ने अपने पत्र में लिखा कि नेशनल हाईवे-24 को खाली कराया जाएं ताकि मरम्मत का काम किया जा सके, वरना इसकी वजह से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

आपको बता दें कि किसानों की विरोध प्रदर्शन के सरकार को भारी नुकसान सहना पड़ रहा है और हर दिन नेशनल हाईवे की हालत भी और बदतर होती जा रही है। गाजीपुर बॉर्डर से मेरठ की तरफ जाने वाले हाईवे पर जगह-जगह जंगली घास उगने लगी हैं और दरारे पड़ गई हैं। ऐसे में अगर इन्हें साफ नहीं किया गया तो हाईवे की हालत और भी ज्यादा बदतर हो सकती है। वहीं सड़क के कुछ हिस्से भी टूट गए हैं। 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाईवे के 300 मीटर हिस्से का हाल कुछ ऐसा ही है लेकिन अगर इसका समाधान नहीं किया गया तो इसका असर 438 किमी लंबे पूरे हाईवे पर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइट्स का इस्तेमाल किसान कर रहे हैं। अब यह लाइट्स सड़कों को रोशन नहीं कर रहीं बल्कि इससे किसानों की एसी चलती हैं।

खोंले जाएं वैकल्पिक रास्ता 

इसी बीच हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तत्काल सोनीपत और झज्जर जिले से दिल्ली जाने के लिए वैकल्पिक रास्ता खोलें क्योंकि किसान आंदोलन की वजह से सिंघू और टिकरी बॉर्डर बंद हैं।  





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