UP Assembly Election से पहले Voter List विवाद, क्या Congress का विरोध केवल एक चुनावी दांव है?

SIR
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अंकित सिंह । Sep 28 2026 3:58PM

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से 2.04 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच कांग्रेस और विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव है। ऐसे में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया को वहां भी बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश विपक्ष की ओर से की जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हाल में ही मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयोग को लेकर जो खुलासे हुए है, उससे विपक्ष को एक बड़ा मौका मिल गया है। अप्रैस में जारी अंतिम सूची से पता चला है कि उत्तर प्रदेश में 166 दिनों तक चली 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के बाद राज्य की वोटर लिस्ट से 2.04 करोड़ से ज़्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। हटाए गए नाम उन कुल वोटरों का 13.21 प्रतिशत हैं जो पिछले साल अक्टूबर में SIR शुरू होने से पहले लिस्ट में शामिल थे।

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SIR से पहले, उत्तर प्रदेश में 15.44 करोड़ वोटर थे। अंतिम वोटर लिस्ट में यह संख्या 13.39 करोड़ है। इनमें से 7.3 करोड़ (कुल वोटरों का 54.54 प्रतिशत) पुरुष हैं और 6.09 करोड़ (45.46 प्रतिशत) महिलाएं हैं। थर्ड जेंडर के 4,206 वोटर हैं। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नदीप रिन्वा द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची से पता चला है कि 18-19 साल की उम्र के ग्रुप में 17.63 लाख मतदाता हैं। अंतिम सूची में लिंगानुपात 834 है, जो पहले के 824 के अनुपात से बेहतर है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा


चुनाव आयोग ने बुधवार को वोटर लिस्ट के देशव्यापी 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर तीन सदस्यों वाले पैनल में मतभेद की खबरों को कम करके आंकने की कोशिश की। आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की ओर से ज़ाहिर की गई व्यक्तिगत राय को आयोग का फ़ैसला नहीं माना जा सकता। सूत्रों के मुताबिक, SIR से जुड़े फ़ैसलों समेत आयोग के सभी फ़ैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंज़ूरी से सर्वसम्मति से लिए गए थे।

रिपोर्ट पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए, EC के सूत्रों ने कहा कि दोनों कमिश्नरों ने वोटर लिस्ट को ठीक करने के दौरान अलग-अलग राज्यों में नाम हटाने और वोटर डेटाबेस को संभालने से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इन मामलों को SIR को लेकर कमीशन के अंदर असहमति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। EC सूत्रों ने कहा कि चूंकि दिमाग इंसानी होता है, कंप्यूटर नहीं, इसलिए विचारों में अंतर होना स्वाभाविक है। लेकिन तालमेल बिठाकर और आम सहमति बनाकर ही चीजें आगे बढ़ती हैं। सूत्रों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि चुनाव आयोग के सभी फ़ैसले सर्वसम्मति से और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दोनों आयुक्तों की मंज़ूरी से लिए गए थे।

क्यों देना पड़ा स्पष्टीकरण


यह स्पष्टीकरण 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR प्रक्रिया के दौरान जारी किए गए फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इस रिपोर्ट से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया; विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से दखल देने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। चुनाव आयोग के अंदर मतभेद की रिपोर्ट पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि कुमार ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को खत्म कर दिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वोट चोरी के अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि यह संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग, जिन्होंने इसका आयोजन किया, उन्होंने देशद्रोह का काम किया है।

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कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन


सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त के घर के मुख्य गेट पर स्प्रे पेंट से निशान भी बनाए गए। विरोध-प्रदर्शन के वीडियो शेयर करते हुए, पार्टी की युवा शाखा 'इंडियन यूथ कांग्रेस' ने X पर लिखा, "आगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 'ज्ञानेश गद्दार' के घर पर काली स्याही पोत दी।" चुनाव आयोग के कामकाज और स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच, कांग्रेस विरोध-प्रदर्शन कर रही है और CEC के इस्तीफ़े की मांग कर रही है। शुक्रवार को भी कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है।

विपक्ष को फायदे की उम्मीद


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद से चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर आ गया है। विपक्ष को लगता है कि चुनाव आयोग को निशाना बनाकर हम जनता के बीच यह संदेश दे सकते हैं कि देश में भाजपा की सरकार वोट चोरी की सरकार है जैसा कि राहुल गांधी बार-बार कह रहे हैं। इसके साथ ही विपक्ष एसआईआर को लेकर भी लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी एसआईआर को राहुल गांधी ने बड़ा मुद्दा बनाया था लेकिन उन्हें बिहार चुनाव के दौरान इसका कोई फायदा नहीं हुआ। यहां तक की चुनाव के दौरान भी एसआईआर को लेकर लोगों में चर्चा तक नहीं थी। लेकिन अब विपक्ष को एक नया हथियार मिला है। ऐसे में फिर से इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।

UP SIR ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे चेक करें

- वोटर सर्च पोर्टल पर जाएँ - चुनाव आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल या सीधे इलेक्टोरल सर्च पेज पर जाएँ।

- SIR सेक्शन ढूँढ़ें - मुख्य पेज पर, “Special Intensive Revision (SIR)‑2026” सेक्शन देखें।

EPIC नंबर से सर्च करें

- “Search your name by EPIC number in draft electoral roll SIR‑2026” पर क्लिक करें।

- अपना EPIC (वोटर ID) नंबर डालें।

- कैप्चा टाइप करें और सर्च पर क्लिक करें।

- अगर आपका नाम ड्राफ़्ट लिस्ट में है, तो ज़िला, निर्वाचन क्षेत्र और पोलिंग स्टेशन जैसी जानकारी दिखाई देगी।

- अगर “No result found” दिखाता है, तो आपका नाम ड्राफ़्ट लिस्ट में नहीं है।

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