एमसीडी क्षेत्र के करीब 5,000 रेहड़ी-पटरी वालों को पीएम स्वनिधि के तहत मिला 16 करोड़ का लोन

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दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले लगभग 5,000 रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को चालू वित्त वर्ष में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 16 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया गया है। इनमें से अधिकांश लाभार्थियों को इस योजना के तहत तीसरी किस्त का ऋण प्राप्त हुआ है। यह योजना रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी जमानत के अपना कारोबार बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले करीब 5,000 रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए अच्छी खबर है। चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत अब तक इन छोटे व्यापारियों को 16 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया जा चुका है। अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस योजना से रेहड़ी-पटरी वालों को अपने कारोबार को मजबूती देने में मदद मिल रही है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से लेकर जुलाई के शुरुआती दिनों तक बैंकों ने कुल 4,931 लाभार्थियों को इस योजना के तहत 16.08 करोड़ रुपये का ऋण दिया है। खास बात यह है कि इस योजना के अंतर्गत बिना किसी जमानत (गारंटी) के ऋण दिया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से अधिकांश रेहड़ी-पटरी वालों ने ऋण की तीसरी किस्त प्राप्त की है, क्योंकि पहली और दूसरी किस्त का समय पर भुगतान करने वाले विक्रेता अधिक राशि के अगले ऋण के पात्र बन जाते हैं।

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस योजना का लाभ उठाने के लिए विक्रेताओं के पास विक्रय प्रमाणपत्र (सीओवी) होना आवश्यक है। इसके तहत कारोबार को शुरू करने, उसे बनाए रखने और बढ़ाने के लिए तीन चरणों में ऋण दिया जाता है। इस योजना के माध्यम से तीनों किस्तों को मिलाकर कुल 90,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें पहली किस्त में 10,000 रुपये, दूसरी में 20,000 रुपये और तीसरी किस्त में 50,000 रुपये का ऋण शामिल है।

ऋण वितरण के विवरण के अनुसार, पहली किस्त के तहत 1,090 रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 10,000 रुपये से 15,000 रुपये तक का ऋण दिया गया, जिसके तहत कुल 1.60 करोड़ रुपये वितरित किए गए। वहीं, दूसरी किस्त के तहत 1,774 विक्रेताओं को 20,000 या 25,000 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें कुल 4.18 करोड़ रुपये बांटे गए। सबसे अधिक 2,067 लाभार्थियों को तीसरी किस्त के तहत 50,000 रुपये तक का ऋण मिला, जिसके माध्यम से कुल 10.30 करोड़ रुपये वितरित किए गए।

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