दिल्ली : धन की कमी की वजह से ‘ बॉलीवुड पार्क’ बनाने की योजना खटाई में पड़ने के आसार

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दिल्ली में एमसीडी द्वारा ‘बॉलीवुड पार्क’ बनाने की महत्वकांक्षी योजना धन की कमी की वजह से खटाई में पड़ती नजर आ रही है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में भारतीय सिनेमा के इतिहास और विकास को कूड़े से बनी कलाकृतियों के जरिये प्रदर्शित करने की परिकल्पना की गई थी।

नयी दिल्ली। दिल्ली में एमसीडी द्वारा ‘बॉलीवुड पार्क’ बनाने की महत्वकांक्षी योजना धन की कमी की वजह से खटाई में पड़ती नजर आ रही है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में भारतीय सिनेमा के इतिहास और विकास को कूड़े से बनी कलाकृतियों के जरिये प्रदर्शित करने की परिकल्पना की गई थी। उन्होंने बताया कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने दक्षिण दिल्ली के जंगपुर के लोकप्रिय ‘वेस्ट टू वंडर’ पार्क की तर्ज पर ‘बॉलीवुड पार्क’ बनाने की योजना बनाई थी। ‘वेस्ट टू वंडर’ पार्क में विश्व के सात अजूबों की प्रतिकृति कबाड़ से बनाई गई है।

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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अबतक पार्क के निर्माण और डिजाइन के लिए निविदा जारी हो जानी चाहिए थी, लेकिन धन की कमी की वजह से अबतक ‘‘ कोई प्रगति’’ नहीं हुई है। आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘‘धन की कमी सबसे बड़ी बाधा है जो बॉलीवुड पार्क निर्माण के रास्ते में आड़े आ रही है। परियोजना के लिए धन नहीं मिल रहा है, इसलिए इसकी प्रगति इस समय पूरी तरह से रुकी हुई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सामान्य परिस्थितियों में परियोजना के लिए निविदा जारी हो जानी चाहिए थी और परियोजना से संबद्ध अन्य तौरतरीके भी पूरे हो जाने चाहिए थे।’’ गौरतलब है कि बॉलीवुड पार्क को 25 करोड़ रुपये में बनाने की योजना थी जिसमें से चार करोड़ रुपये की राशि पार्क के रखरखाव और परिचालन पर खर्च होनी है। इस पार्क के निर्माण के प्रस्ताव को तत्कालीन दक्षिण दिल्ली नगर निगम (अब विलय कर एक दिल्ली नगर निगम का गठन किया गया है) की स्थायी समिति ने जनवरी में हुई बैठक में मंजूरी दी थी। अधिकारी ने बताया कि धन की व्यवस्था की जा रही है ताकि परियोजना को चालू रखा जा सके।

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उन्होंने कहा, ‘‘परियोजना जमीन पर शुरू होने के बाद पार्क को बनाने में कम से कम छह से आठ महीने का समय लगेगा। इसलिए हम कुछ धन की व्यवस्था कर रहे हैं ताकि परियोजना में और देरी नहीं हो।’’ एमसीडी के एक अन्य सूत्र ने बताया कि नगर निकाय की अब पहली प्राथमिकता अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन देने और इसके बाद मनोरंजन आदि की परियोजनाओं पर ध्यान देने की है।

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