Janakpuri में फर्जी कॉल सेंटर से बीमा ठगी करने वाले 43 लोग पकड़े गए

पश्चिमी दिल्ली पुलिस ने जनकपुरी इलाके में बीमा पॉलिसीधारकों से धोखाधड़ी करने वाले एक अवैध कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। छापेमारी में 32 महिलाओं समेत 43 लोग पकड़े गए, जिनमें मुख्य आरोपी विशाल कपूर समेत पांच को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से 48 मोबाइल, 22 कार्ड, लैपटॉप और दो लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।
नयी दिल्ली, पांच नवंबर दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में बीमा के नाम पर कथित तौर पर ठगी करने वाले एक कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 32 महिलाओं समेत 43 लोगों को पकड़ा है। एक पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पश्चिमी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि बुधवार रात छापेमारी के दौरान इस कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया गया और आरोपी बीमा कंपनी के प्रतिनिधि बनकर बीमी पॉलिसीधारकों के साथ कथित रूप से ठगी करते थे।
पकड़े गए लोगों में मालिक, प्रबंधकीय कर्मचारी और वहां काम करने वाले टेली-कॉलर शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि बाकी 38 लोग टेलीकॉलर हैं। उन्होंने बताया कि कथित सरगना की पहचान हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद के रहने वाले विशाल कपूर (35) के रूप में हुई है।
गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में नितिन शर्मा (39), गुंजन (23), अजय (24) और भीम (35) शामिल हैं। छापेमारी के दौरान, पुलिस ने कर्मचारियों को अपने वर्कस्टेशन पर बैठे और कीपैड वाले मोबाइल से फोन करते हुए पाया। डीसीपी ने बताया, वे कथित तौर पर पीएनबी मेटलाइफ, एसबीआई इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और भारती एक्सा जैसी विभिन्न बीमा कंपनियों के पॉलिसीधारकों से संपर्क कर रहे थे, और खुद को उन कंपनियों का प्रतिनिधि बता रहे थे।
पुलिस के अनुसार, वे पॉलिसीधारकों को भुगतान करने के लिए लुभाने के लिए अतिरिक्त बीमा लाभ और आकर्षक योजनाओं का प्रस्ताव दे रहे थे। पुलिस ने बताया कि इसके बाद इच्छुक ग्राहकों का संपर्क प्रबंधकीय और अन्य क कर्मचारियों से कराया जाता था। आरोप है कि मालिक ने पॉलिसीधारकों का डेटा और उनके संपर्क नंबर हासिल किए और उन्हें टेलीकॉलर को दे दिए।
पुलिस ने बताया कि वह अंतिम लेन-देन का समन्वय भी करता था और पैसे स्थानांतरित करने के लिए बैंक खाते का विवरण उपलब्ध कराता था। पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान, मालिक और प्रशासनिक कर्मचारी बैंकों या बीमा कंपनियों से ऐसा कोई संतोषजनक अधिकृत दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जो यह साबित करे कि उन्हें पॉलिसीधारकों से संपर्क करने या उनका व्यक्तिगत डेटा प्राप्त करने का अधिकार है। पुलिस के मुताबिक, परिसर में एएमएसआर वेल्थ क्रिएटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम वाले कर्मचारी पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों के रोजाना के कामकाज की जानकारी और ग्राहकों से जुड़ी जानकारियां साझा करने के लिए कथित तौर पर एएमएसआर डेली रिपोर्टिंग नाम से एक ऑनलाइन समूह बनाया गया था। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को वेतन केवल नकद में दिया जाता था। पुलिस ने बताया कि मालिक के मोबाइल फोन में मिले दो बैंक खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज पांच शिकायतों से जुड़े मिले।
छापे के दौरान कुल दो लाख रुपये नकद, 40 कीपैड वाले फोन समेत 48 मोबाइल, एक लैपटॉप, 38 सिम कार्ड और 22 डेबिट, क्रेडिट और पेमेंट कार्ड जब्त किए गए। इस बाबत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
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