302 किलोमीटर लंबा होगा मेरठ से गुजरने वाला 'आर्थिक गलियारा'

302 किलोमीटर लंबा होगा मेरठ से गुजरने वाला 'आर्थिक गलियारा'

देश के 44 आर्थिक गलियारे में बिलासपुर-दिल्ली रूट भी है। इसे 302 किलोमीटर में बनाया जाना है। इसकी शुरुआत कई एक्सप्रेस-वे को जोड़कर की जानी है। जिनका निर्माण भी चल रहा है। इसमें दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे मुख्य प्रोजेक्ट हैं।

मेरठ। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को अपनी फेसबुक वाल पर पोस्ट शेयर कर आर्थिक गलियारे के फायदे बताए। अगले पांच वर्षों में मेरठ परिवहन साधनों के साथ औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में भी विकसित होने जा रहा है। इसी के चलते मेरठ को आर्थिक गलियारे में शामिल किया गया है। भारतमाला परियोजना के फेज-प्रथम आर्थिक गलियारे में मेरठ भी है। मेरठ को बिलासपुर (पंजाब के मोगा जिले में) से दिल्ली रूट में शामिल किया गया है। आर्थिक गलियारे में शामिल होने से सामान को एक शहर से दूसरे शहर में पहुंचाने के लिए कई विकल्प मौजूद होंगे।  

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देश के 44 आर्थिक गलियारे में बिलासपुर-दिल्ली रूट भी है। इसे 302 किलोमीटर में बनाया जाना है। इसकी शुरुआत कई एक्सप्रेस-वे को जोड़कर की जानी है। जिनका निर्माण भी चल रहा है। इसमें दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे मुख्य प्रोजेक्ट हैं। आर्थिक गलियारे में उच्च गति के परिवहन नेटवर्क को विकसित करने की तैयारी है। इसी को देखते हुए भारतमाला परियोजना के तहत इसकी तैयारी की जा रही है। जिससे आपस में प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी कम समय में हो सके। इससे सामान का आवागमन कम दाम में तेज रफ्तार के साथ हो सकेगा। इससे समय की बचत होगी। 

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वहीं, देश की आर्थिक व्यवस्था को आगे बढ़ाने में परिवहन का योगदान हो सकेगा। आर्थिक गलियारे को कई भागों में बनाया जा रहा है। इसमें इंटर कॉरिडोर और फीडर रोड भी शामिल है। इसमें करनाल-मेरठ मार्ग को भी शामिल किया गया है। इसे 101 किमी की फीडर रोड में शामिल किया गया है। एक या दो कॉरिडोर को आपस में जोड़ने वाली सड़क को फीडर रोड कहा जाता है। इसी को देखते हुए मेरठ-करनाल मार्ग को शामिल किया गया है। ये मार्ग पंजाब सहित उत्तर प्रदेश में आने वाली सड़क को आपस में जोड़ता है। बिलासपुर, जगाधरी, यमुनानगर, सहारनपुर, रुड़की, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली आदि आर्थिक गलियारे में शामिल होने वाले शहर होंगे।





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