PM मोदी की पहल का असर, बाजार में छाने को तैयार हैं आगरा में बने खादी के जूते

PM मोदी की पहल का असर, बाजार में छाने को तैयार हैं आगरा में बने खादी के जूते

इस फैसले पर शहर के निर्माताओं ने कहा कि स्थानीय उत्पादों के प्रचार के लिए पीएम मोदी के लोकल के लिए वोकल अभियान के बाद यह निर्णय लिया गया। रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट के सैंपल उदाहरण के तौर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग को भेजा गया है।

प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के अभियान का असर जल्द ही देखने को मिल सकता है जब आपके पैरों में खादी से बने जूते होंगे। यह मौका कोई और नहीं बल्कि ताज नगरी आगरा ही पूरे देश को देने जा रहा है। खादी ब्रांड और खादी से बने जूते देश को एक नया फैशन प्रदान करेंगे जिसमें देसी अंदाज होगा और अपनापन होगा। आगरा फुटवियर उद्योग भारत में सबसे बड़ा फुटवियर विनिर्माण हब है। आगरा के जूता उद्योग का घरेलू बाजार में 65% हिस्सा है। अब कुछ ही दिनों में खादी के जूते की एक श्रृंखला आने वाली है। अब चमड़े या फिर सिंथेटिक जूते की बजाय खादी से बने जूते आपके वार्डरोब की शोभा बढ़ाएंगे।

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इस फैसले पर शहर के निर्माताओं ने कहा कि स्थानीय उत्पादों के प्रचार के लिए पीएम मोदी के लोकल के लिए वोकल अभियान के बाद यह निर्णय लिया गया। रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट के सैंपल उदाहरण के तौर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग को भेजा गया है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग ही इन जूतों के डिजाइनओं पर अंतिम मंजूरी देगा। खादी के लगभग 26 जोड़ी जूतों का डिजाइन श्रुति कौल ने किया है। श्रुति ने बताया कि उनके द्वारा देश भर से उदाहरणों को शामिल करने की कोशिश की गई है। जूते की खासियत बताते हुए कहा कि यह धोए भी जा सकते है। वहीं आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं एक्सपोर्टर चैंबर्स के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि हम अपना काम निरंतर करते है और हमारे लिए गर्व की बात रही कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने खादी के जूते की एक श्रृंखला बनाने के लिए हमसे संपर्क किया। 

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निर्माताओं को इस बात की उम्मीद है कि बाजार में इन जूतों की मांग अच्छी होगी। पिछले वित्तीय वर्ष में, आगरा ने देश में 4,000 करोड़ रुपये का फुटवियर निर्यात किया। खादी की हस्तनिर्मित सामग्री विदेशों में भी लोकप्रिय है, इसलिए इस संग्रह की अनूठी बुनाई और बनावट के हिट होने की संभावना है। हालांकि खादी ग्रामोद्योग आयोग ने इस परियोजना से जुड़ी कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष वीके सक्सेना ने कहा कि अतीत में भी खादी को हमने बढ़ाने की कोशिश की है और आगे भी करते रहेंगे। हाल ही में खादी इंडिया ने खादी से बनी कलाई घड़ी की एक नई श्रृंखला बाजार में पेश की है।





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