India-US Trade Deal के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, Delhi Mahapanchayat में जुटेंगे 550 से ज्यादा किसान संगठन

आयोजकों का दावा है कि इसमें देश भर से करीब 550 किसान संगठन और सामाजिक संस्थाएं हिस्सा लेंगी। ब्यास से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, किसान मज़दूर संघर्ष समिति पंजाब के नेता जर्मनजीत सिंह बंदाला ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का भारतीय किसानों, मज़दूरों, छोटे व्यापारियों और आम जनता पर बुरा असर पड़ेगा।
पंजाब से किसानों का एक बड़ा जत्था रविवार को दिल्ली के लिए रवाना हुआ। वे 21 जुलाई को प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में होने वाली महापंचायत में हिस्सा लेंगे। दिल्ली के किसान घाट पर होने वाली इस सभा को 'देश बचाओ मोर्चा' ने बुलाया है। आयोजकों का दावा है कि इसमें देश भर से करीब 550 किसान संगठन और सामाजिक संस्थाएं हिस्सा लेंगी। ब्यास से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, किसान मज़दूर संघर्ष समिति पंजाब के नेता जर्मनजीत सिंह बंदाला ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का भारतीय किसानों, मज़दूरों, छोटे व्यापारियों और आम जनता पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते का मकसद अमेरिकी कंपनियों और किसानों को फ़ायदा पहुँचाना है, जबकि भारत के छोटे और सीमांत किसानों के हितों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
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बंदाला ने तर्क दिया कि अमेरिकी खेती बहुत बड़े पैमाने पर होती है, जहाँ खेत हज़ारों एकड़ में फैले होते हैं और उन्हें सरकार से भारी सब्सिडी मिलती है। इसके उलट, उन्होंने कहा कि ज़्यादातर भारतीय किसानों के पास सिर्फ़ दो से ढाई एकड़ ज़मीन होती है और उन्हें बहुत कम आर्थिक मदद मिलती है। उन्होंने दावा किया कि अगर इस समझौते के तहत अमेरिका से सस्ता कृषि सामान भारतीय बाज़ार में आता है, तो छोटे भारतीय किसानों के लिए मुक़ाबला करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे उनकी खेती से होने वाली आमदनी में भारी गिरावट आएगी। किसान नेता ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने खेती-बाड़ी के क्षेत्र को विदेशी प्रभाव से बचाकर रखा था, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में आकर इस व्यापार समझौते को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रस्तावित समझौते का असर सिर्फ़ खेती तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छोटे कारोबार और दूसरे क्षेत्रों में रोज़गार के मौकों पर भी असर पड़ेगा।
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बंडाला ने कहा कि 21 जुलाई को होने वाली महापंचायत में पंजाब के किसानों के साथ-साथ कई दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम स्थल तक पहुँचने से रोका, तो वे वहीं शांतिपूर्ण सभाएँ करेंगे जहाँ उन्हें रोका जाएगा और अपनी चिंताओं के बारे में जागरूकता फैलाना जारी रखेंगे। इस विरोध-प्रदर्शन को "सिर्फ़ शुरुआत" बताते हुए बंडाला ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द नहीं किया और किसानों की माँगें नहीं मानीं, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान संगठन अपनी माँगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
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