हिमाचल में बीएड कॉलेजों के निरीक्षण की एवज में एनसीटीई में चल रहा फर्जीवाड़ा

हिमाचल में बीएड कॉलेजों के निरीक्षण की एवज में एनसीटीई में चल रहा फर्जीवाड़ा

अधिकारियों को निजी क्षेत्र में संचालित अध्यापक प्रशिक्षण संस्थानों के निरीक्षण के लिए प्रवेश में कुछ टीमें बना कर भेजी जाती है। असल मे अधिकारी निरीक्षण के नाम पर केवल उगाही करने का काम करते है। प्रदेश मे लगभग ऐसे 70 कालेज है जहां अध्यापक बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जो बीएड कालेज हिमाचल मे चल रहे उनमें से अधिकांश गुणवत्ता के मानक पूरे नहीं करते।

धर्मशाला। प्रदेश के जिला कांगडा के बीएड कालेजों के निरीक्षण की एवज में पैसा वसूली करने के आरोप में पकड़े गए राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद, एनसीटीई के अधिकारियों के मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिससे इस मामले में चल रहे पैसे के लेनदेन के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में गिरफ्तार अधिकारी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से संबंधित है।

 

विजिलेंस ने रिश्वत मामलों में एनसीटीई के चार अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान संजीव कुमार निवासी अलीगढ़, उत्तर प्रदेश व महिला कर्मी काव्या दुबे निवासी झांसी, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है। वहीं, क्षत्रिय कॉलेज ऑफ एजूकेशन इंदौरा में गिरफ्तार महिला कर्मी डॉ. सीमा शर्मा निवासी भवानी नगर मेरठ (यूपी) की है।

 

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दरअसल, इन अधिकारियों को निजी क्षेत्र में संचालित अध्यापक प्रशिक्षण संस्थानों के निरीक्षण के लिए प्रवेश में कुछ टीमें बना कर भेजी जाती है। असल मे अधिकारी निरीक्षण के नाम पर केवल उगाही करने का काम करते है। प्रदेश मे लगभग ऐसे 70 कालेज है जहां अध्यापक बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जो बीएड कालेज हिमाचल मे चल रहे उनमें से अधिकांश गुणवत्ता के मानक पूरे नहीं करते। वह बीएड करवाने वाली दुकाने भर है। इसलिए वह केन्द्र से आई टीम को रिश्वत देने के लिए मजबूर होते है। यह सच्चाई है हिमाचल मे निजि क्षेत्र मे खुले विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और बीएड कालेजों मे अधिकांश क्वालिटी एजुकेशन देने मे असफल है। जिन्हे भी निरीक्षण या नियंत्रित करने के लिए तैनात किया जाता है,उनमे अधिकांश लोग भ्रष्टाचार के चलते फर्जीवाड़े का हिस्सा बन जाते है। 

 

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इस मामले में इन अधिकारियों के दिल्ली से आने से पहले ही लेन-देन की रकम तय हो चुकी थी। उन्होंने शिक्षण संस्थान प्रबंधकों से तय कर लिया था कि मान्यता देने की अनुशंसा रिपोर्ट बनाने की एवज में कितना पैसा लिया जाएगा। ऐसे में यह अधिकारी निरीक्षण करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि वसूली करने ही आए थे। आरोपियों को अदालत ने 18 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा है। विजिलेंस पुलिस अब पांच निजी शैक्षणिक संस्थान प्रबंधकों से पूछताछ करेगी कि किसने कितने पैसे दिए हैं। ऐसे में संस्थान प्रबंधकों पर गाज गिरना तय है।

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इस बीच, इंदौरा में पैसे लेते पकड़े दो आरोपितों में से डा. महेश प्रसाद निवासी शिवाजी नगर, भोपाल को इस लेन-देन की कोई जानकारी नहीं थी। सारी साठगांठ डा. सीमा शर्मा ने की थी। ऐसे में डा. महेश को मामले से बाहर कर दिया है। डा. सीमा से तलाशी के दौरान दो लाख रुपये के अलावा तीन लाख छह हजार रुपये और मिले हैं। 

विजिलेंस ने रिश्वत मामलों में एनसीटीई के चार अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इसमें चार संस्थानों में जांच कर गगल के निजी होटल में ठहरे दो अधिकारियों को 11 लाख 48 हजार रुपये की नकदी के साथ पकड़ा था। उनकी पहचान संजीव निवासी अलीगढ़ और काव्या दुबे निवासी झांसी के रूप में हुई है। दूसरे मामले में इंदौरा के निजी शिक्षण संस्थान प्रबंधकों से दो लाख रुपये रुपये की रिश्वत लेते डा. सीमा शर्मा व डा. महेश प्रसाद को पकड़ा था। अब डा. महेश को जांच से बाहर कर दिया है।

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विजिलेंस पुलिस धर्मशाला के एसपी बलबीर सिंह ने बताया कि रिश्वत लेने के मामले में पकड़े चार अधिकारियों में से एक की संलिप्तता नहीं पाई गई है। तीन आरोपियों को स्पेशल जज धर्मशाला की कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 18 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इंदौरा मामले की महिला अधिकारी के पास दो लाख के अलावा तीन लाख छह हजार रुपये की राशि भी बरामद हुई है। 





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