सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान के Makkah Defense Pact पर बोले पूर्व राजनयिक, West Asia में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेत

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ANI
अभिनय आकाश । Aug 13 2026 7:57PM

पूर्व राजदूत ने कहा मुझे लगता है कि यह डिफेंस पैक्ट दिलचस्प है और खासकर इसका समय। यह अमेरिका की डगमगाती स्थिति को दिखाता है, क्योंकि अमेरिका दुनिया भर में अलग-अलग इलाकों की सुरक्षा और हिफ़ाज़त का गारंटर रहा है। पिछले डेढ़ साल में हालात बदले हैं।

पूर्व राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हाल ही में घोषित त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह इस क्षेत्र में वॉशिंगटन के घटते प्रभाव को दिखाता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भले ही यह समझौता मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से जुड़ा है, लेकिन नई दिल्ली को स्थिति पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में ऐसी स्थिति बन सकती है जब वे "अपनी नीति बदल लें।"

उन्होंने ANI को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हाल ही में घोषित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के बारे में बात करते हुए ये बातें कहीं।

सोनी ने इस समझौते के समय को "दिलचस्प" बताया। उन्होंने कहा कि इस समूह की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब एक वैश्विक सुरक्षा प्रदाता के तौर पर अमेरिका की स्थिति की परीक्षा हो रही है, खासकर पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण।

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पूर्व राजदूत ने कहा मुझे लगता है कि यह डिफेंस पैक्ट दिलचस्प है और खासकर इसका समय। यह अमेरिका की डगमगाती स्थिति को दिखाता है, क्योंकि अमेरिका दुनिया भर में अलग-अलग इलाकों की सुरक्षा और हिफ़ाज़त का गारंटर रहा है। पिछले डेढ़ साल में हालात बदले हैं... लोगों को अब अमेरिका के क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के वादे पर ज़्यादा भरोसा नहीं रहा है। इसलिए इस मामले में पश्चिम एशिया की कुछ क्षेत्रीय ताकतें, खासकर सऊदी अरब, इसे लेकर बहुत चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ईरान के हमले पश्चिम एशिया के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं, जिससे उन पर असर पड़ा है। अब उन देशों को लगता है कि चूंकि अमेरिका का वादा पूरा नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्था के बारे में सोचना चाहिए जिसमें शामिल ताकतें इस तरह की सुरक्षा में योगदान दे सकें।

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उन्होंने कहा कि इस समझौते का बनना अमेरिका की कमज़ोरी को दिखाता है और यह इस इलाके में अमेरिका के घटते असर और दिलचस्पी को भी दर्शाता है। और इसीलिए ये तीन ताकतें और उनकी खासियतें एक साथ आ सकती हैं और यह पक्का कर सकती हैं कि कोई बाहरी ताकत आकर कुछ न कर सके।

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