स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जरूरी, Supreme Court ने ECI के SIR को सही बताया

Supreme Court
ANI
अंकित सिंह । May 27 2026 12:27PM

उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को बल देता है और यह आयोग के वैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है, जिससे उसकी व्यापक शक्तियों की पुष्टि होती है।

बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाता है। न्यायालय ने कहा कि एसआईआर का संचालन निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने व्यवस्था दी कि यह नहीं कहा जा सकता कि निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का प्रयोग करके अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर काम किया है। 

इसे भी पढ़ें: Byjus Founder Sentence | बायजू रवींद्रन को सिंगापुर कोर्ट से बड़ा झटका: अदालत की अवमानना में 6 महीने जेल की सजा, $70,500 का जुर्माना भी लगा

पीठ ने कहा कि हम इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते कि विवादित प्रक्रिया केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनाई गई थी। इसके विपरीत, हम मानते हैं कि चुनावी एसआईआर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक आवश्यकता को बल देता है। एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं में दावा किया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उससे संबंधित नियमों के तहत निर्वाचन आयोग को इतने व्यापक स्तर पर एसआईआर कराने का अधिकार नहीं है। शीर्ष न्यायालय ने 29 जनवरी को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन याचिकाओं में गैर-सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) की याचिका भी शामिल थी। बिहार में एसआईआर अभियान का पहला चरण चलाया गया था। 

पिछले वर्ष 12 अगस्त को न्यायालय ने मामले में अंतिम बहस शुरू की थी और तब कहा था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करना या हटाना निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है। निर्वाचन आयोग ने एसआईआर अभियान के तहत प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख लोगों के नाम सार्वजनिक किए थे। एसआईआर अधिसूचना के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, उन्हें उस समय सूची में शामिल किसी व्यक्ति से अपना पैतृक संबंध साबित करना था। 

इसे भी पढ़ें: Supreme Court verdict on SIR | चुनाव आयोग को बड़ी राहत! विशेष गहन संशोधन (SIR) को बताया कानूनी रूप से मान्य, विपक्ष को झटका

एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा था कि आधार और मतदाता पहचान पत्र को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण ‘‘राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसी प्रक्रिया’’ है, जिसमें निर्वाचन आयोग नागरिकता की जांच कर रहा है, जबकि यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़