Haridwar में मरम्मत के लिए गंग नहर 18 दिन बंद, Bhimgoda Barrage से रोका गया पानी

उत्तराखंड के हरिद्वार में वार्षिक सफाई और मरम्मत कार्यों को पूरा करने के लिए गंग नहर में जलापूर्ति 18 दिनों के लिए रोक दी गई है। भीमगोड़ा बैराज से पानी रोके जाने के कारण कानपुर तक की नहर सूख गई है, जिससे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, हर की पौड़ी पर आरती के लिए लगभग 200 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी में गंग नहर को वार्षिक रखरखाव और मरम्मत कार्य के लिए अगले 18 दिनों तक बंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नहर मंगलवार व बुधवार की मध्यरात्रि से बंद की गई और इसमें दीपावली से ठीक पहले सात और आठ नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास जलप्रवाह फिर से शुरू होने की संभावना है।
हरिद्वार के पास भीमगोड़ा बैराज पर पानी का प्रवाह रोक दिया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश के कानपुर तक फैली गंग नहर सूख गई है। हालांकि, हर की पौड़ी उत्तराखंड में है लेकिन गंग नहर नेटवर्क का प्रबंधन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग करता है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के उपखंड अधिकारी (हेडवर्क्स) भारत भूषण ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नहर को हर साल बंद करने से उसकी सफाई करने के साथ ही कानपुर तक के मार्ग में जरूरी मरम्मत और रखरखाव के कार्य किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि अगले साल की शुरुआत में हरिद्वार में होने वाले अर्धकुंभ मेले के मद्देनजर विभिन्न विभाग स्थायी और अस्थायी बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि नहर बंद रहने की अवधि में इन कार्यों में तेजी लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि नहर बंद रहने के दौरान हर की पौड़ी में गंगा आरती के लिए लगभग 200 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नहर को हर साल बंद करना जरूरी है, ताकि उसमें छिपी ऐसी क्षति का पता लगाया जा सके, जो पानी का प्रवाह जारी रहने के दौरान नजर नहीं आती। उन्होंने बताया, “ऊपरी गंग नहर को हर साल रखरखाव के लिए अस्थायी रूप से बंद किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नहर प्रणाली में ऐसी खामियों या क्षति का पता लगाना है, जो सालभर पानी का प्रवाह जारी रहने के दौरान नजर नहीं आतीं।
इसलिए हर साल पूरी प्रणाली का निरीक्षण किया जाता है और क्षति या समस्याओं की पहचान कर जरूरी काम पूरे किए जाते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि नहर प्रणाली अगले साल भी सुचारू रूप से काम करती रहे।” नहर बंद होने से दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में रहने वाले लोगों को जलापूर्ति की कमी का सामना करना पड़ सकता है। नहर बंद किये जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में खेती पर भी काफी असर पड़ने की आशंका है।
इन क्षेत्रों के किसानों के लिए गंगा नहर को जीवनरेखा माना जाता है। नहर सूखी होने के कारण हरिद्वार पहुंचे श्रद्धालुओं को भी निराशा हुई।
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