गोवा विधानसभा में नया कारागार विधेयक पारित, जेल में मोबाइल मिलने पर होगी 3 साल की सजा

गोवा विधानसभा ने जेलों में अनुशासन और सुरक्षा बढ़ाने के लिए गोवा कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक पारित किया है। नए कानून के तहत जेल परिसर में मोबाइल या प्रतिबंधित उपकरण रखने को गैर-जमानती अपराध बनाते हुए 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सदन ने वकीलों की सुरक्षा से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी ध्वनिमत से पारित किया।
पणजी, दो सितंबर गोवा विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत जेल के अंदर मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखना गैर-जमानती अपराध होगा और इसके लिए तीन साल तक की जेल तथा 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। गोवा कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक, 2026 के अनुसार, इस अपराध के लिए दी गई सजा उस सजा की अवधि पूरी होने के बाद शुरू होगी, जिसे कैदी पहले से भुगत रहा है। यह विधेयक मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया था।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, संवेदनशील बैरकों और कोठरी में तैनात जेल कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला किया जाएगा, ताकि कैदियों और कर्मचारियों के बीच किसी तरह का ‘‘गठजोड़’’ न बने और कामकाज में लापरवाही की स्थिति पैदा न हो। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि गंभीर जोखिम वाले, कुख्यात या आदतन अपराधियों की सजा पूरी होने के बाद उनकी रिहाई की सूचना संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को दी जाएगी। इसी तरह जमानत पर रिहा किए गए विचाराधीन कैदियों तथा पैरोल या फरलो पर अस्थायी रूप से बाहर भेजे गए कैदियों की जानकारी भी संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक को दी जाएगी, ताकि उनकी निगरानी की जा सके।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में यह विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य मौजूदा जेल कानून की जगह एक व्यापक कानून लागू करना है। इसमें जेलों में प्रतिबंधित सामान, मोबाइल फोन के इस्तेमाल और जेल के भीतर से संचालित संगठित आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं।
विधानसभा ने मंगलवार शाम को विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए कानून के तहत जेल के अंदर मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण रखना या उनका इस्तेमाल करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा। इसके लिए तीन साल तक की जेल की सजा और 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
यह विधेयक केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदर्श कारागार एवं सुधारात्मक सेवा कानून, 2023 के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जेलों से जुड़े अलग-अलग मौजूदा कानूनों को एक व्यापक कानून के तहत लाना है। साथ ही, इसमें कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए नए प्रावधान किए गए हैं तथा जेल में रहते हुए उनके बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
इसके अलावा विधानसभा ने वकीलों पर हमला करने के मामले में कड़ी सजा के प्रावधान वाला विधेयक भी पारित किया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर सात साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। गोवा अधिवक्ता सुरक्षा विधेयक, 2026 मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया।
इसमें धमकियों का सामना कर रहे वकीलों को पुलिस सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इसके तहत वकीलों के खिलाफ झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
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