हेमंत सोरेन की कुर्सी रहेगी या जाएगी? झारखंड में बढ़ा राजनीतिक सस्पेंस, मुख्यमंत्री के पद को लेकर राज्यपाल ले सकते हैं फैसला

Hemant Soren
ANI
रेनू तिवारी । Aug 26, 2022 8:57AM
झारखंड में सियासी हलचल काफी तेज है। इस 'तेज' का प्रकाश इतना तेज है कि इसके झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को भी हिला दिया है। अर्थात झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी खतरे में हैं क्योंकि माना जा रहा है कि उन्होंने जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 9ए उल्लंघन किया है।

रांची। झारखंड में सियासी हलचल काफी तेज है। इस 'तेज' का प्रकाश इतना तेज है कि इसके झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को भी हिला दिया है। अर्थात झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी खतरे में हैं क्योंकि माना जा रहा है कि उन्होंने जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 9ए उल्लंघन किया है। चुनाव आयोग के पास इस धारा को लेकर निर्णय लेने का अधिकार प्राप्य है। जांच के बाद चुवान आयोग ने लिफाफे में अपना फैसला बंद कर दिया है। अब क्या हेमंत सोरेन की कुर्सी रहेगी या जाएगी इसका फैसला झारखंड राज्यपाल रमेश वैश्य करेंगे। राज्यपाल को चुनाव आयोग ने अपना फैसला बता दिया है लेकिन इस बाद की जानकारी अभी सीएम आवास तक नहीं पहुंची है। अब फाइनल कॉल का इंतजार हैं। 

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राज्य में हेमंत सोरेन को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं हैं। उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा में भी हलचल मची हैं। अपने सुप्रीम नेता पर लगे आरोपों को गलत साबित करने के लिए पार्टी रणनीति तैयार कर रही हैं। फरवरी 2022 में बीजेपी की डेलिगेशन ने हेमंत सोरेन पर अपने पद का दुरप्रयोग करने और रांची के अनगड़ा में अपने नाम से खनन पट्टा खरीदने का आरोप लगाया था, इसके अलावा यह भी दावा किया था कि यह मामला सीएम हेमंत सोरेन से जुड़े खनन लीज और शेल कंपनियों में उनके और उनके करीबियों की हिस्सेदारी से जुड़ा है। इसक पूरे मामले को चुनाव आयोग के सामने बीजेपी ने रखा था और उनकी सदस्यता को रद्द करने की मांग की थी। ये मामला सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग में गया। 

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खनन पट्टा मामले में घिरे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परोक्ष रूप से केन्द्र पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘संवैधानिक संस्थानों को तो खरीद लोगे, जनसमर्थन कैसे खरीद पाओगे?’’ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने कार्यकाल के दौरान खुद के नाम से रांची में खनन पट्टा आवंटित कराने के मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर निर्वाचन आयोग की राय झारखंड के राजभवन पहुंचने के बाद अपनी सरकार गिरने की आशंकाओं के बीच एक के बाद एक ट्वीट किये जिनमें उन्होंने कहा, ‘‘हमने राज्य में कल भी काम किया था और आज भी कर रहे हैं, “संवैधानिक संस्थानों को तो खरीद लोगे, जनसमर्थन कैसे खरीद पाओगे ?

दूसरे ट्वीट में मुख्यमंत्री ने बुधवार की अपने मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के पुलिसकर्मियों को एक माह का अतिरिक्त मूल वेतन देने के फैसले और उसके बाद पुलिसकर्मियों में व्याप्त खुशी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘झारखण्ड के हमारे हजारों मेहनती पुलिसकर्मियों का यह स्नेह और यहाँ की जनता का समर्थन ही मेरी ताकत है। हैं तैयार हम! जय झारखण्ड!’’ मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने लोकसभा सांसद विजय कुमार हंसदा के एक ट्वीट को रीट्वीट किया, ‘‘झारखंड की सरकार को अस्थिर करने की साजिश चल रही है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य में जो काम हो रहे हैं, वो इन शक्तियों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

राज्य में हम जनता की सेवा करते रहेंगे। इनकी हर साजिश बेनकाब होगी। झामुमो झारखंड के विकास के लिए काम करती रहेगी।’’ इससे पूर्व उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी दावा किया कि राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता का आशीर्वाद उसके साथ है साथ ही उसने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से कोई भी निर्णय आता है, वह कोई अंतिम निर्णय नहीं होगा क्योंकि पार्टी के अन्य विकल्प भी खुले हुए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज यहां पार्टी कार्यालय पर एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।

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