इंफाल जिले की हिंगांग विधानसभा सीट, जहां जीत किसी भी पार्टी की हो, विधायक तो बीरेन सिंह ही होते हैं

नामांकन पत्र दाखिल करते समय बीरेन सिंह के साथ मणिपुर भाजपा अध्यक्ष ए शारदा देवी भी थीं। सीएम बीरेन सिंह ने अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद कहा कि हिंगांग निर्वाचन क्षेत्र से अपने कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी को 'नाममात्र उम्मीदवार' करार दिया।
मणिपुर का सियासी पारा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बढ़ चुका है। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले में हिंगांग विधानसभा सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन पत्र दाखिल करते समय बीरेन सिंह के साथ मणिपुर भाजपा अध्यक्ष ए शारदा देवी भी थीं। सीएम बीरेन सिंह ने अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद कहा कि हिंगांग निर्वाचन क्षेत्र से अपने कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी को "नाममात्र उम्मीदवार" करार दिया। 2007 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले एन बिरेन सिंह लगातार चार बार यहां से विधायक हैं। ऐसे में आपको मणिपुर की हिंगांग विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास से रूबरू करवाते हैं।
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हिंगांग का राजनीतिक इतिहास
मणिपुर की हिंगांग विधानसभा सीट पर साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में फेडरल पार्टी ऑफ मणिपुर के उम्मीदवार डॉ. वकामबम तोहिबा विधायक चुने गए थे। साल 2002 के विधानसभा चुनाव में डेमोक्रेटिक रिवॉल्यूशनरी पीपल्स पार्टी के उम्मीदवार बीरेन सिंह विधायक चुने गए। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में एन बीरेन सिंह को दोबारा इस सीट से सफलता मिली। साल 2017 में वीरेन सिंह ने इस सीट से जीत की हैट्रिक लगाई लेकिन इस बार बीजेपी के टिकट पर उन्हें जीत हासिल हुई। उन्होंने इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार शरत चंद्र सिंह को 9 हजार से अधिक मतों से पराजित किया। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर 38.29 प्रतिशत था। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का वोट शेयर 33.87 प्रतिशत और कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 26.88 प्रतिशत था।
साल 2017 के परिणाम
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट |
| एन बीरेन सिंह | बीजेपी | 10,349 |
| शरत चंद्र सिंह | तृणमूल कांग्रेस | 9,233 |
| एन. रतन मीती | कांग्रेस | 7,329 |
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