Prabhasakshi NewsRoom: Taliban के समर्थन में खुलकर उतरा India ! Afghanistan पर लगे UNSC प्रतिबंधों में राहत देने का दिया सुझाव

S Jaishankar Muttaqi
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देखा जाये तो भारत का यह रुख केवल मानवीय चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे सामरिक और रणनीतिक निहितार्थ भी हैं। अफगानिस्तान मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच महत्वपूर्ण भौगोलिक कड़ी है।

तालिबान के पक्ष में उतरा भारत। यह बात सुन कर आप भले चौंक जायें लेकिन हकीकत यही है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अफगानिस्तान को लेकर ऐसा रुख अपनाया है जिसे वैश्विक कूटनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने कहा है कि अफगानिस्तान की बदली हुई राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा प्रतिबंध व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि केवल दंडात्मक उपायों के सहारे आगे बढ़ने की नीति अब सीमित परिणाम दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जो अफगान जनता के हित में हों और सकारात्मक कदमों को प्रोत्साहित करें। भारत का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगस्त 2021 में काबुल पर तालिबान के नियंत्रण के बाद से वैश्विक समुदाय अब भी अफगानिस्तान को लेकर स्पष्ट और एकमत नीति तय नहीं कर पाया है।

देखा जाये तो भारत का यह रुख केवल मानवीय चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे सामरिक और रणनीतिक निहितार्थ भी हैं। अफगानिस्तान मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच महत्वपूर्ण भौगोलिक कड़ी है। भारत लंबे समय से वहां विकास परियोजनाओं, आधारभूत ढांचे और मानवीय सहायता के माध्यम से अपनी उपस्थिति बनाए हुए है। ऐसे में यदि अफगानिस्तान पूरी तरह अस्थिर रहता है या अंतरराष्ट्रीय अलगाव का शिकार होता है तो इसका लाभ आतंकवादी संगठनों और भारत विरोधी तत्वों को मिल सकता है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अफगान धरती का उपयोग किसी भी आतंकवादी गतिविधि के लिए न हो। इसी संदर्भ में भारत ने तालिबान नेतृत्व के साथ व्यवहारिक संवाद का रास्ता चुना है। हालांकि भारत ने अभी तक औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन काबुल में अपना दूतावास फिर से सक्रिय कर दिया है और अफगान मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों का नई दिल्ली में स्वागत भी किया है।

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भारत की रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू पाकिस्तान को संतुलित करना है। अफगानिस्तान में पाकिस्तान लंबे समय से प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में भारत का सक्रिय कूटनीतिक और मानवीय जुड़ाव क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अफगान प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उसकी भूमि का उपयोग भारत के खिलाफ किसी भी हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह सुरक्षा दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत ने अफगानिस्तान में अपनी मानवीय और विकास सहायता को लगातार जारी रखा है। राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि भारत की सहायता योजनाएं अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में चल रही हैं और 500 से अधिक विकास परियोजनाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंच रही हैं। भारत खाद्यान्न, दवाइयां, आपदा राहत सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है। भारत ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने, भूकंप प्रभावित इलाकों में आवास पुनर्निर्माण तथा महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं की मरम्मत का भी संकल्प लिया है। इसके साथ ही शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी भारत सक्रिय है। भारतीय छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से अफगान छात्रों को सहायता दी जा रही है। क्रिकेट और सांस्कृतिक संबंध भी दोनों देशों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं।

व्यापार और संपर्क के क्षेत्र में भी भारत और अफगानिस्तान सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। भारत अफगानिस्तान के खनन क्षेत्र में संभावनाएं तलाश रहा है और भारत अफगान वायु माल गलियारे के जरिए व्यापार को सरल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। क्षेत्रीय संपर्क के लिए भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह का उपयोग करता है, जिससे पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान तक पहुंच बनाई जा सके।

इसी बीच भारत ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने इन हमलों को अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। भारत ने नागरिकों की मौत और लक्षित हत्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि इस वर्ष के पहले तीन महीनों में 372 नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए, जिनमें अधिकांश घटनाएं रमजान के दौरान हुईं। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन सुनिश्चित होना चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के कार्यों का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे कठिन समय में यह संस्था अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा, भारत ने पाकिस्तान की उस टिप्पणी का भी अप्रत्यक्ष जवाब दिया जिसमें संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। भारत ने कहा कि बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र के समर्थन को सुविधा के अनुसार स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

बहरहाल, भारत की वर्तमान अफगान नीति व्यवहारिक कूटनीति, मानवीय सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं का संतुलित मिश्रण है। नई दिल्ली यह समझती है कि अफगानिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग करने से वहां कट्टरपंथ, आतंकवाद और अस्थिरता और बढ़ सकती है। इसलिए भारत सकारात्मक जुड़ाव, विकास सहयोग और रणनीतिक संवाद के जरिए अफगानिस्तान में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। यह नीति न केवल अफगान जनता के हित में है बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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