RCEP में शामिल होने के बारे में सोच रहा है भारत? जानिए केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा

RCEP में शामिल होने के बारे में सोच रहा है भारत? जानिए केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा

पीयूष गोयल ने कहा कि 2014 के बाद से, हम संरचनात्मक सुधारों, प्रक्रियाओं को मज़बूत करने, व्यापार करना आसान बनाने, अधिक धर्मनिरपेक्ष विकास के मामले में अर्थव्यवस्था को स्थिर करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारा अपना अनुभव कहता है कि पिछले 7-8 वर्षों में विभिन्न कार्यक्रमों ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत द्वारा 'क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी)' में शामिल होने के लिए बातचीत फिर से शुरू करने से इनकार करते हुए कहा कि देश दो साल पहले राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने के लिए वार्ता से बाहर हो गया था। गोयल ने कहा कि कुछ देश (आरसीईपी वार्ता के दौरान) व्यापार वार्ता में अपारदर्शी होते हुए भी कानून के शासन का पालन नहीं कर रहे थे। गोयल ने बातचीत में शामिल होने के लिए तत्कालीन कांग्रेस नीत यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि चर्चा शुरू करने और आरसीईपी वार्ता में भाग लेने के एक गलत निर्णय के कारण भारत ने कीमती समय गंवा दिया।

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पीयूष गोयल ने कहा कि 2014 के बाद से, हम संरचनात्मक सुधारों, प्रक्रियाओं को मज़बूत करने, व्यापार करना आसान बनाने, अधिक धर्मनिरपेक्ष विकास के मामले में अर्थव्यवस्था को स्थिर करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारा अपना अनुभव कहता है कि पिछले 7-8 वर्षों में विभिन्न कार्यक्रमों ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया है। हमारे पास तेज़ी से बढ़ती अक्षय ऊर्जा है। आज हमारी स्वच्छ ऊर्जा हमारी जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की तुलना में कम लागत पर है। 2020 में कोविड संकट ने हमें बेहतर स्वास्थ्य सेवा,वैक्सीन विकास,ऊर्जा स्वतंत्रता के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमने समय रहते संकट को पहचाना और उसे अवसर में बदला।भारत-यूएई सीईपीए के माध्यम से हम अपने संबंधों का विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं। बता दें कि 15 देशों के आरसीईपी को दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक माना जाता है। भारत 2012 में आरसीईपी वार्ता में शामिल हुआ। 2019 में, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित 15 देशों ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, भारत राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए वार्ता से बाहर हो गया।





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