देश की पहली कोरोना मरीज वापस लौटना चाहती है वुहान, यह है बड़ा कारण

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निधि अविनाश । Jan 30, 2022 1:17PM
छात्रा भारत की पहली कोरोना मरीज थी। दो साल पहले यानि की 30 दिसंबर 2022 को भारत में कोरोना से पीड़ित पहले मरीज की पहचान हुई थी। हालांकि, अब वह बिल्कुल स्वस्थ है और अब अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के लिए फिर से एक बार वुहान जाना चाहती है।

लोग अपने करियर के लिए कुछ भी कर देना चाहते है और ऐसा ही कुछ केरल के त्रिसुर की रहने वाली युवती ने कर दिखाया है। बचपन से डॉक्टर का सपना देखने वाली भारत की छात्रा चीन के वुहान में मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। लेकिन जब कोरोना महामारी ने दुनिया में अपना पैर पसारा तो वह कोरोना का शिकार हो गई। बता दें कि, यह छात्रा भारत की पहली कोरोना मरीज थी। दो साल पहले यानि की 30 दिसंबर 2022 को भारत में कोरोना से पीड़ित पहले मरीज की पहचान हुई थी। हालांकि, अब वह बिल्कुल स्वस्थ है और अब अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के लिए फिर से एक बार वुहान जाना चाहती है। लड़की के पिता ने कहा कि, कोरोना को अब काबू किया जा सकता है और बेटी के करियर के लिए यह करना पड़ेगा। 

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जब वुहान में कोरोना महामारी अपना कहर बरपा रहा थआ तब केरल की छात्रा वापस त्रिसूर लौट आई थी लेकिन हफ्ते बाद ही वह कोरोना पॉजिटिव हो गई। अगर वह वुहान में कोरोना पॉजिटिव पाई जाती तो शायद उनका भारत लौटना बहुत मुश्किल हो जाता। बता दें कि, छात्रा इस दौरान ऑनलाइन क्लास लेकर अपनी पढ़ाई कर रही है। उन्होंने  पिछले वर्ष दिसंबर महीने में एमबीबीएस कोर्स को ऑनलाइन ही कंप्लीट कर लिया था और परीक्षा भी पास कर ली थी। लेकिन अब उन्हें कॉलेड लौटना होगा क्योंकि चीन के कानून के मुताबिक,  एमबीबीएस स्टूडेंट्स को 52 सप्ताह तक इंटर्नशिप प्रोग्राम में शामिल होना ही पड़ता है और ग्रेजुएशन फाइनल ईयर के बाद अस्पताल में उनकी मौजुदगी काफी महत्वपूर्ण होती है। अगर ऐसा नहीं किया तो डिग्री नहीं दी जाती है।

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बता दें कि, इस समय वुहान में सभी कॉलेज बंद है। छात्रा के पिता के मुताबिक, बेटी को चीन जाना होगा, वुहान में कई अधिकारियों से बात करने के बाद केन्द्र सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने आगे कहा कि, कोरोना से सभी प्रभावित हुए है और मेरी बेटी भी इससे अछुती नहीं रही है। वह दो बार कोरोना से  संक्रमित हुई है। पहली भारतीय जब कोरोना से संक्रमित हुई तो उस समय डॉक्टरों के पास कोई जानकारी नहीं थी और न ही उस वायरस को कोई नाम दिया गया था। बाद में जब इसे कोविड-19 नाम दिया गया तब छात्रा में कई लक्षण दिखने शुरू हो गए। वह त्रिसूर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थी।

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