ताजमहल के इतिहास की जानकारी: HC ने कर दी थी याचिका खारिज, अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

Taj Mahal
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अभिनय आकाश । Sep 30, 2022 6:33PM
रजनीश सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कोर्ट इसमें तथ्यों की पड़ताल के लिए एक कमेटी का गठन करें, जो ताजमहल की हकीकत को सामने लाए ताकि इससे जुड़े विवाद पर विराम लग सके।

ताजमहल को लेकर विवादों का सिलसिला शाहजहां की मौत के बाद से ही चला रहा है। मौजूदा दौर में मोहब्बत की निशानी सियासत की निशानी बन चुकी है। दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल के असल इतिहास का पता लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है। ताजमहल के वास्तविक इतिहास का अध्ययन करने और विवाद को शांत करने और इसके इतिहास को स्पष्ट करने" के लिए एक तथ्य खोज समिति के गठन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता डॉ. रजनीश सिंह का कहना है कि ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल के लिए 1631 से 1653 तक 22 वर्षों की अवधि के लिए किया था, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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रजनीश सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कोर्ट इसमें तथ्यों की पड़ताल के लिए एक कमेटी का गठन करें, जो ताजमहल की हकीकत को सामने लाए ताकि इससे जुड़े विवाद पर विराम लग सके। याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 12 मई के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें इस आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी कि मुद्दे न्यायिक रूप से निर्धारित नहीं थे। अधिवक्ता समीर श्रीवास्तव के माध्यम से दायर याचिका के अनुसार एनसीईआरटी ने उन्हें एक आरटीआई प्रश्न में उत्तर दिया कि शाहजहाँ द्वारा ताजमहल के निर्माण के संबंध में कोई प्राथमिक स्रोत उपलब्ध नहीं था। याचिकाकर्ता ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में एक और आरटीआई दायर की लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

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22 कमरे को खुलवाने की अर्जी

डॉ. रजनीश सिंह ने 7 मई को ताजमहल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। उनका दावा था कि ये मकबरा नहीं बल्कि शिव मंदिर है। याचिका में कहा गया था कि 1212 एडी में राजा परामदृदेव ने तेजो महालय बनवाया जो बाद में जयपुर के राजा मानसिंह को विरासत में मिल गई उसके बाद इसके आधिकारी राजा जयसिंह हुए। राजा ने तेजो महालय को तोड़ पाया और मकबरा बना दिया। सारी बातें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि जाइए और पढ़िए पहले एमए की पढ़ाई। फिर पीएचडी कीजिए और इसमें आप अपने विषय को चुनिए। तब उस विषय पर शोध पर आपको कोई संस्थान रोके तो हमारे पास आइएगा। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।

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