सामाजिक समरसता व सांस्कृतिक एकता के लिए जरूरी एकात्म-यात्राएं: आनंदीबेन

Integral trips required for social harmony and cultural unity: Anandiben
[email protected] । Feb 26 2018 7:30PM

मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश में सामाजिक समरसता और देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में एकात्म-यात्राएं निकाली तथा अब आदि शंकराचार्य की 108 फुट की अष्टधातु की प्रतिमा ओंकारेश्वर में स्थापित करेगी।

भोपाल। मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश में सामाजिक समरसता और देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में एकात्म-यात्राएं निकाली तथा अब आदि शंकराचार्य की 108 फुट की अष्टधातु की प्रतिमा ओंकारेश्वर में स्थापित करेगी। विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन अपने अभिभाषण में राज्यपाल ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मेरी सरकार ने सामाजिक समरसता और देश की मूलभूत सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए एकात्म-यात्राएं प्रदेश के सभी जिलों में निकाली हैं।’’

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक एकता के देवदूत, अद्वैत दर्शन के प्रखर प्रवक्ता और सनातन संस्कृति के पुनरूद्धारक आदि शंकराचार्य के एकात्म दर्शन को इस यात्रा के जरिये जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया गया। आनंदीबेन ने कहा, ‘‘प्रदेश के ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फुट की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित करने की मेरी सरकार की योजना है।’’ उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर में ही आदि शंकराचार्य स्मृति वेदांत संस्थान की स्थापना की जायेगी। 

राज्यपाल ने कहा, ‘‘मेरी सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास’ की अवधारणा से कार्य कर रही है। मेरी सरकार की निगाह से कोई वर्ग और तबका भूला-बिसरा नहीं रहा है। जाति, धर्म और वर्ग से परे सरकार की योजनाओं का लाभ सभी के लिये सुनिश्चित किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में गरीब कल्याण को समर्पित किया गया। सरकार की कोशिश रही कि गरीब कल्याण का एजेंडा समाज और सरकार का साझा एजेंडा बने।

आनंदीबेन ने कहा, ‘‘मेरी सरकार की प्राथमिकता हर गरीब के लिए रोटी, कपड़ा, मकान के साथ पढ़ाई, दवाई और रोजगार है और रहेगी।’’ प्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी के संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के लिए नदी के दोनों तटों पर की गई 144 दिनों की ‘नमामि देवी नर्मदे-सेवा यात्रा’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस यात्रा से लोगों को नदी के संरक्षण की जरूरत एवं वानस्पतिक आच्छादन, स्वच्छता और साफ-सफाई, मृदा और जल संरक्षण के साथ-साथ प्रदूषण की रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया।

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