ISRO के नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 का शुक्रवार रात GSLV से होगा प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह को रवाना करने की तैयारी पूरी कर चुका है। 2,232 किलोग्राम वजनी इस उपग्रह को 50 मीटर ऊंचे रॉकेट की मदद से भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा में भेजा जाएगा। मिशन की कामयाबी सुनिश्चित करने के लिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी तकनीकी बदलाव भी किए गए हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को कहा कि भारत के अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 के प्रक्षेपण के लिए 24 घंटे की उलटी गिनती शुरू हो गई है और यह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। जीएसएलवी रॉकेट के जरिए इस उपग्रह को शुक्रवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-एसएचएआर) के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से रवाना किया जाएगा। प्रक्षेपण के लिए उलटी गिनती आधिकारिक रूप से बृहस्पतिवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर शुरू हुई थी।
पचास मीटर ऊंचे और तीन चरणों वाले इस रॉकेट का प्रक्षेपण के समय कुल वजन 420 टन होगा। इसका लक्ष्य 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह को भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित करना है। इसरो की ओर से जारी मिशन पुस्तिका के अनुसार, उपग्रह को जिस कक्षा में स्थापित करने का लक्ष्य है, उसमें पृथ्वी से उसकी निकटतम दूरी 170 किलोमीटर और सबसे अधिक दूरी 37,023 किलोमीटर होगी।
इस कक्षा का झुकाव 20.75 डिग्री होगा। इसरो एनवीएस-03 उपग्रह को एक असामान्य तकनीकी व्यवस्था के तहत प्रक्षेपित करने जा रहा है। इस व्यवस्था में उपग्रह के पायरो तकनीक से संचालित वाल्व प्रक्षेपण से पहले ही खुले रहेंगे।
यह सामान्य सुरक्षा प्रक्रियाओं से एक बड़ा बदलाव है। आमतौर पर प्रक्षेपण के दौरान होने वाले तेज कंपन से अंतरिक्ष यान के ईंधन तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए प्रणोदक की आपूर्ति को अलग रखा जाता है। इस विशेष व्यवस्था का उद्देश्य जनवरी 2025 में एनवीएस-02 मिशन के दौरान सामने आई कनेक्टर की खराबी को दोबारा होने से रोकना है।
उस खराबी के कारण उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। सूत्रों के अनुसार, मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति की ओर से सुझाए गए सुधारात्मक उपायों को भी इस प्रक्षेपण में पूरी तरह शामिल किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य प्रणाली में वैकल्पिक व्यवस्था बढ़ाना और पायरो प्रणाली के संचालन को अधिक विश्वसनीय बनाना है।
एनवीएस-03 भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ (नाविक) के लिए एक महत्वपूर्ण उपग्रह है। इसमें स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर द्वारा विकसित स्वदेशी रूबिडियम परमाणु घड़ी लगाई गई है। यह उपग्रह एल1, एल5 और एस बैंड पर संकेत प्रसारित करेगा।
एल1 बैंड को शामिल किए जाने से यह प्रणाली आधुनिक स्मार्टफोन के सिविलियन चिपसेट और पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अनुकूल हो जाएगी। जीटीओ में स्थापित होने के बाद उपग्रह अपनी कक्षा को धीरे-धीरे ऊंचा करने के लिए कई चरणों में कक्षीय गतिविधियां करेगा। इसके बाद यह 32.5 डिग्री पूर्वी देशांतर पर अपनी अंतिम भू-स्थिर कक्षा में स्थापित हो जाएगा।
शुक्रवार का प्रक्षेपण देश की क्षेत्रीय स्थिति निर्धारण और नेविगेशन सेवाओं को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि नाविक उपग्रह समूह को अपनी पूरी परिचालन क्षमता हासिल करने और पूरे सेवा क्षेत्र में लगातार भरोसेमंद सेवाएं देने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी काफी काम करना बाकी है। इसरो इस बार जीएसएलवी एमके-2 रॉकेट के प्रदर्शन पर विशेष नजर रखेगा।
उसका लक्ष्य इस बार रॉकेट का प्रक्षेपण बिना किसी गड़बड़ी के पूरा करना और उसे लंबे समय से मिले ‘नॉटी बॉय’ (शरारती) के तमगे से छुटकारा दिलाना है। इस रॉकेट को यह नाम इसके तीसरे चरण की क्रायोजेनिक जटिलताओं के कारण मिला है।
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