Kashmir में 'Jashn-e-Adab Sahityotsav Cultural Kaarva’n Virasat' 2023 ने जीत लिया सबका दिल

Jashn e Adab Sahityotsav Cultural Kaarvan Virasat 2023
Prabhasakshi

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर पर्यटन के सहयोग से 'जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव सांस्कृतिक कारवां विरासत 2023' का आयोजन किया गया जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में प्रसिद्ध रचनाकारों और कलाकारों ने भाग लिया।

कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद से माहौल में अब काफी बदलाव आ चुका है। जिस कश्मीर घाटी में शाम सात बजे के बाद सड़कें वीरान और सूनसान हो जाया करती थीं आज वहां आधी रात तक भी रौनक रहती है। अलगाववादी संगठन हुर्रियत के फरमानों के चलते कश्मीर के जिन बाजारों को सप्ताह में कभी कभार ही खुलने की इजाजत होती थी अब वह मध्यरात्रि तक खुले रहते हैं जिससे दुकानदार काफी खुश हैं। इसके अलावा, श्रीनगर शहर की रौनक और लाइटिंग रात्रि को देखते ही बनती है। रात में आइसक्रीम और कुल्फी का आनंद लेने के लिए जब लोगों की भीड़ निकलती है तो देखकर लगता ही नहीं कि यह वही वाला कश्मीर है जो अनुच्छेद 370 लगे रहने के दौरान इस तरह का जीवन जीने के लिए तरसता था। कश्मीर में हाउसबोटें फुल हैं और शिकारा राइड कराने वालों को दो शिफ्टों में काम करना पड़ रहा है क्योंकि अब रात्रि में भी लोग शिकारा की सैर करने आते हैं।

यही नहीं, कश्मीर में इन दिनों पर्यटकों की आवक के अलावा विदेशी मेहमान भी खूब आ रहे हैं। इसके अलावा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संगीत संध्याओं का भी खूब आयोजन हो रहा है। इसी कड़ी में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर पर्यटन के सहयोग से 'जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव सांस्कृतिक कारवां विरासत 2023' का आयोजन किया गया जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में प्रसिद्ध रचनाकारों और कलाकारों ने भाग लिया। संस्कृति और साहित्य से जुड़े इस कार्यक्रम को स्थानीय लोगों ने भी खूब सराहा। प्रभासाक्षी संवाददाता ने इस कार्यक्रम का जायजा लिया और देशभर से आयी कला और साहित्य जगत की हस्तियों से बात की तो सभी ने यहां के बदलते माहौल को सराहा।

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हम आपको बता दें कि तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अशोक चक्रधर, प्रसिद्ध अभिनेता मनु ऋषि चड्ढा और भारत भर से उर्दू कवियों ने भाग लिया। जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव सांस्कृतिक कारवाँ विरासत 2023 हमारे देश की विरासत का सार प्रस्तुत करता है जो हिंदुस्तानी कला, संस्कृति और साहित्य के रूप में जीवित है। जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव हिंदुस्तानी कला, संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए समर्पित सबसे बड़े प्लेटफार्मों में से भी एक है।

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