जदयू के महेश्वर हजारी विपक्ष के बहिष्कार के बीच विधानसभा उपाध्यक्ष निर्वाचित

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विपक्षी राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, भाकपा और माकपा के सदस्य सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए और खुले में एक समानंतर सत्र आयोजित किया। इसमें विपक्ष ने राजद के भूदेव चौधरी को ‘‘अध्यक्ष’’ चुना।

पटना। जनता दल (यू) के वरिष्ठ नेता महेश्वर हजारी बुधवार को विपक्ष के बहिष्कार के बीच बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। विपक्ष ने एक दिन पहले बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021 के उनके विरोध के दौरान राजग पर प्रतिपक्ष के सदस्यों की आवाज का दबाने का आरोप लगाया गया था। हजारी को, सदन में विपक्षी सदस्यों की गैरहाजरी के बीच, ध्वनि मत से उपाध्यक्ष चुना गया। विपक्षी राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, भाकपा और माकपा के सदस्य सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए और खुले में एक समानंतर सत्र आयोजित किया। इसमें विपक्ष ने राजद के भूदेव चौधरी को ‘‘अध्यक्ष’’ चुना। चौधरी ने विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दायर किया था लेकिन न उन्होंने और न ही विपक्षी विधायकों ने उपाध्यक्ष के चुनाव में हिस्सा लिया।

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इससे पहले, विपक्षी विधायकों ने बुधवार को बजट सत्र के अंतिम दिन विधानसभा के मुख्य भवन के बाहर प्रदर्शन किया, जहां वे तख्तियां लिए खड़े थे और उन्होंने एक दिन पहले की घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। महागठबंधन बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 का विरोध कर रहा है जिसे मंगलवार रात को ध्वनिमत से पारित किया गया था। यह विधेयक बिहार मिलिट्री पुलिस का नाम बदलने का प्रस्ताव करता है, उसे कहीं अधिक शक्तियां देता है जो हवाईअड्डों, नेपाल के साथ लगती सीमा, बोध गया में अंतरराष्ट्रीय रूप से प्रसिद्ध बोधि मंदिर परिसर की सुरक्षा में अर्धसैनिक बलों की सहायता करती है। पुलिस विधेयक को विधानपरिषद में विपक्षी सदस्यों के बहिष्कार के बीच बुधवार को पारित कर दिया गया।

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विधानसभा में बोलते हुए, कुमार ने मंगलवार को सदन में हंगामे पर अप्रसन्न्ता व्यक्त की। मंगलवार कोकई बार कार्यवाही बाधित हुई और विपक्षी विधायकों को तब मार्शलों और पुलिस कर्मियों की मदद से बाहर करना पड़ा जब उन्होंने स्पीकर को अपनी सीट पर बैठने से रोकने की कोशिश की। मुख्यमंत्री कुमार ने यह टिप्पणी तब की जब वह उपाध्यक्ष निर्वाचित होने पर हजारी को बधाई दे रहे थे। विपक्ष का कहना है कि विधेयक में प्रावधानों- जैसे तलाशी और गिरफ्तारी से पहले वारंट की आवश्यकता को खत्म करना- का उद्देश्य पुलिस को अनियंत्रित शक्तियां देना है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह आश्चर्यजनक है कि विपक्ष ने भी अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया। शायद उन्हें पता था कि उनके पास संख्या नहीं है, इसलिए उन्होंने कुछ बहाने के तहत बाहर रहना बेहतर समझा।’’ कुमार ने कहा कि विपक्ष को अपने सलाहकारों से सावधान रहने की जरूरत है और इससे वह सदन की कार्यवाही में शामिल होने से दूर हो रहा है। हालांकि, विपक्ष ने दोपहर के भोजन के बाद के सत्र का बहिष्कार जारी रखा, जिसे निजी सदस्यों के विधेयकों के लिए निर्धारित किया गया था। विपक्षी नेताओं ने कहा, ‘‘विपक्ष के बिना सदन को चलाने का कोई मतलब नहीं है। सरकार ने यदि इस तथ्य को ध्यान में रखा होता तो माननीय सदस्यों को कल अपमान से गुजरना नहीं पड़ता।’’ विपक्षी नेताओं ने कहा, ‘‘हम मुख्यमंत्री से अपेक्षा करते हैं कि वे उन चोटों को देखे जो शारीरिक और मानसिक दोनों है।’’ सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें विपक्षी विधायकों को घसीटा जाना और उनके बालों सेखींचना और महिला विधायकों द्वारा पुलिसकर्मियों द्वारा धक्का-मुक्की करते देखा जा सकता है। यह कार्रवाई तब हुई जब विपक्षी विधायकों ने स्पीकर विजय कुमार सिन्हा के चैंबर की घेराबंदी करने का प्रयास किया और उन्हें सदन में पहुंचने और कामकाज फिर से शुरू करने से रोका गया। बाद में, पुलिस कर्मियों को विधानसभा में प्रवेश करना पड़ा और उन्होंने हंगामा कर रहे विधायकों को बाहर करने में मार्शलों की मदद की। इन विधायकों ने फर्नीचर में तोड़फोड़ की और अध्यक्ष के मंच पर चढ़ गए ताकि उन्हें आसन ग्रहण करने से रोक सकें। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और उनके विधायक भाई तेज प्रताप यादव ने मंगलवार को यहां सड़कों पर विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

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