झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद: राहुल गांधी ने दिया छात्रों को आश्वासन, BJP ने बोला राजनीतिक लाभ लेने का हमला

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया है। प्रदर्शनकारियों में शामिल एक छात्र नेता ने बृहस्पतिवार को यह दावा किया।
झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा आंदोलन और तेज हो गया है। छात्र-नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन के 13वें दिन कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी युवाओं से फोन पर बात कर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन की एक प्रमुख सहयोगी दल है।
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छात्र नेता रविंद्र पासवान ने दावा किया कि बृहस्पतिवार शाम टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए।
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उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया। छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं। छात्र-नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन को बृहस्पतिवार को 13 दिन पूरे हो गए। पासवान ने संवाददाताओं से कहा, मेरी राहुल गांधी से बातचीत हुई। मैंने उन्हें यहां की स्थिति से अवगत कराया, खासतौर पर यह बताया कि परीक्षा माफिया किस तरह फल-फूल रहा है। मैंने उनसे कहा कि चूंकि उनकी पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है, इसलिए उन्हें इस मामले में कांग्रेस का रुख स्पष्ट करना चाहिए।
राहुल गांधी की टेलीफोन पर हुई बातचीत पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता केवल इससे राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहते थे।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘क्या वे वास्तव में समाधान चाहते हैं? यहां उनकी गठबंधन सरकार है, जिसमें उनके चार मंत्री तक हैं, लेकिन उनमें से एक भी प्रदर्शन स्थल पर नहीं आया। उनकी पार्टी के प्रभारी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता के. राजू ने प्रदर्शन स्थल से महज एक किलोमीटर दूर स्थित मुख्यमंत्री आवास का दौरा किया, लेकिन उन्होंने छात्रों से मिलना तक जरूरी नहीं समझा।’’ आंदोलन कर रहे छात्रों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने हेतु 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया। जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के बैनर तले शुरू हुआ यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में राज्य के सबसे बड़े छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलनों में से एक बनकर उभरा है।
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