Jharkhand परीक्षा में CBI probe पर अड़े छात्र, सरकार ने 98 फीसदी मांगें मानीं

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रांची में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के खिलाफ 16 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच छठे दौर की वार्ता बेनतीजा रही। छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की सीबीआई जांच पर अड़े हैं और 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करने की योजना पर कायम हैं। सरकार का दावा है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने समेत उनकी ज्यादातर मांगें स्वीकार कर ली गई हैं।

रांची, नौ अगस्त झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की अपनी मांग पर रविवार को अड़े रहे, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच रविवार को आयोजित छठे दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। अधिकारियों के जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग को छोड़कर प्रदर्शनकारियों की 98 फीसदी मांगें मान लेने का दावा करने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध दूर नहीं हो सका।

छात्र नेता रवींद्र पासवान ने राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद कहा, “हमारी ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द किया जाना भी शामिल है। हालांकि, जब तक सीबीआई जांच की हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती, हम कोई समझौता नहीं करेंगे। हम 10 अगस्त को तय योजना के तहत झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करेंगे।” झारखंड के तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार ने 98 फीसदी मांगें मान ली हैं, लेकिन वह जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग को मानने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि यह परीक्षा उच्च न्यायालय और शीर्ष अदालत की निगरानी में आयोजित की गई थी।

कुमार प्रदर्शनकारी छात्रों से बात करने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “हमारी छात्रों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई; राज्य सरकार झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की सिफारिश करेगी। अब उन्हें तय करना है कि आंदोलन वापस लेना है या नहीं।” कुमार ने परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालत की स्थापना की घोषणा भी की।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में आरोपपत्र 90 दिन के भीतर दाखिल किया जाएगा। कुमार ने कहा, “परीक्षा में सुधार से जुड़े सुझाव देने के लिए आईआईटी-आईएसएम धनबाद, आईआईएम रांची और एक्सएलआरआई जमशेदपुर के विशेषज्ञों को लेकर एक समिति भी बनाई जाएगी।” उन्होंने बताया कि सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने की भी सहमति जता दी है। इससे पहले, मुख्यमंत्री सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पारदर्शिता के साथ न्याय दिलाने का संकल्प जताया।

उन्होंने कहा कि बातचीत से ही सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है, लाठी-डंडे से नहीं। सोरेन ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतंत्र को बाधित करने के लिए निहित स्वार्थ वाले लोग पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

सोरेन ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले लोगों को युवाओं को गुमराह करने के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंता उनकी भी चिंता है और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्यपाल गंगवार ने भी छात्रों से अपील की कि वे इस मामले को आंदोलन के बजाय “बातचीत” के जरिये सुलझाएं।

उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे प्रदर्शनकारियों के लिए हमेशा खुले हैं। झारखंड सरकार और प्रदर्शकारी छात्रों के बीच छठे दौर की बातचीत रांची स्थित राज्य अतिथि गृह में हुई। छात्रों का प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी है, जिसमें छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

वामपंथ समर्थित छात्र संगठन ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी वार्ता में हिस्सा लिया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख छात्र संगठन ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ की मुख्य मांगों में 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द किया जाना, सभी परीक्षाओं की सीबीआई से जांच कराया जाना, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाना और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किया जाना शामिल है। छात्र वित्त विभाग के अनुभाग अधिकारी और कथित अनियमितताओं का खुलासा करने वाले संतोष कुमार मस्ताना का निलंबन रद्द करने तथा उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं।

झारखंड अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने सितंबर 2024 में हुई जेएसएससी संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर कथित तौर पर “फर्जी विमर्श” का प्रसार करने के मामले में मस्ताना को अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया था। झारखंड उच्च न्यायालय ने इस साल उन्हें नियमित जमानत दे दी थी। सरकार और छात्र संगठनों के बीच शुक्रवार रात और शनिवार को हुई कई बैठकों में गतिरोध दूर नहीं होने के बाद एक और दौर की बातचीत करने का फैसला किया गया।

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