JPSC Job Scam: झारखंड CID ने पूर्व चेयरमैन Khyangte को दबोचा, सरकारी नौकरियों पर सवाल

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती घोटालों में कथित भूमिका के लिए पूर्व JPSC चेयरमैन एल. खियांगते को रांची में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच CID ने गिरफ़्तार किया है। छात्र भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की स्वतंत्र CBI जांच और प्रणालीगत सुधारों की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने CID जांच और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की है।
सूत्रों के मुताबिक, झारखंड CID ने JPSC और JSSC नौकरी घोटालों में कथित भूमिका के लिए पूर्व PSC चेयरमैन एल. खियांगते को गिरफ़्तार किया है। भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों में कथित तौर पर शामिल होने के कारण CID ने उनसे कई बार पूछताछ की थी। यह गिरफ़्तारी रांची में JPSC-JSSC उम्मीदवारों के लगातार विरोध-प्रदर्शन के बीच हुई है, जो राज्य की भर्ती परीक्षा प्रणाली में सुधार और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
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सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक मनोज कौशिक ने खियांग्ते की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि पूर्व जेपीएससी प्रमुख को आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। अतिरिक्त महानिदेशक (सीआईडी) मनोज कौशिक ने कहा कि हमने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के सिलसिले में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने पहले भर्ती में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) से जांच समेत कई तरह के एक्शन प्लान की घोषणा की थी।
रविवार को छात्रों के साथ लंबी बैठक के बाद सरकार उनकी कई मांगों को मानने के लिए भी सहमत हो गई थी, जिनमें 14वीं JPSC परीक्षा और 2023 व 2025 की बैकलॉग भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना शामिल था। हालांकि, छात्रों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि CBI जांच की उनकी मुख्य मांग नहीं मानी गई है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने झारखंड सरकार पर "झूठ" फैलाने का आरोप लगाया; सरकार का दावा था कि उसने छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें पूरी कर दी हैं।
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एक छात्र नेता ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने जिन 13 परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की थी, उनमें से सरकार ने सिर्फ़ तीन ही रद्द की हैं। छात्र नेताओं ने CID जांच पर भरोसा करने के सरकार के फ़ैसले की आलोचना की और आरोप लगाया कि यह एजेंसी पहले भी मामलों को दबाने (cover-ups) में शामिल रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कथित गड़बड़ियों का पता लगाने और जवाबदेही तय करने के लिए एक स्वतंत्र जांच ज़रूरी है।
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