Viral Video होने के बाद हरकत में आई सरकार, Odisha में कंकाल लेकर बैंक पहुंचे आदिवासी व्यक्ति को मिला न्याय

Odisha
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एकता । Apr 29 2026 12:23PM

ओड़िशा के क्योंझर में एक आदिवासी व्यक्ति, जीतू मुंडा, बैंकिंग प्रक्रिया न समझ पाने के कारण अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया, जिसका वीडियो वायरल हो गया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच हुई और पीड़ित को आर्थिक सहायता के साथ न्याय मिला।

ओड़िशा के क्योंझर जिले से दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति, जीतू मुंडा, अपनी दिवंगत बहन का कंकाल कंधे पर लादे ओडिशा ग्रामीण बैंक की मलिपासी शाखा ले जाते हुए दिखाई दिए। यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर फैल गया और लोगों ने बैंक की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।

क्या है पूरा मामला?

जीतू मुंडा (50 वर्ष) ओडिशा के क्योंझर जिले के रहने वाले हैं। उनकी बहन काकरा मुंडा का दो महीने पहले निधन हो गया था। उनके परिवार में अब और कोई नहीं बचा था, इसलिए जीतू मुंडा उनकी बैंक खाते की रकम निकालने के लिए ओडिशा ग्रामीण बैंक की मलिपासी शाखा गए थे। बैंक ने उनसे पैसे देने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस होने के कागजात मांगे। चूँकि जीतू मुंडा पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए वे इस कानूनी प्रक्रिया को समझ नहीं पाए और खाली हाथ लौट आए।

कागजी कार्रवाई न समझ पाने की वजह से वे बेबस हो गए। इसके बाद उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने अपनी बहन की कब्र खोदी, कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटा और तपती गर्मी में पैदल चलकर बैंक ले गए। वहाँ मौजूद लोग यह देखकर हैरान रह गए।

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वीडियो वायरल होते ही एक्शन में आई सरकार

जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ और मामला तूल पकड़ने लगा, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे तुरंत संज्ञान में लिया। मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री ने घटना की गंभीरता को देखते हुए इसके उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए। उन्होंने उत्तरी संभाग के राजस्व आयुक्त को मामले की जांच करने के लिए निर्देश दिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

बैंक ने क्या कहा?

वायरल वीडियो के बाद बैंक ने भी अपना पक्ष रखा। बैंक ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इन आरोपों को गलत बताया कि उन्होंने पैसे देने के लिए मृत महिला की शारीरिक मौजूदगी की मांग की थी। बैंक के अनुसार, उन्होंने केवल मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी कागजात मांगे थे। बैंक ने आगे बताया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र जारी करते ही, उन्होंने तुरंत 19,402 रुपये की राशि तीन कानूनी वारिसों के नाम पर सेटल कर दी और पैसे उन्हें सौंप दिए। इंडियन ओवरसीज बैंक, जो इस ग्रामीण बैंक का प्रायोजक है, उसने भी यही स्पष्ट किया कि बैंक ने केवल नियम के अनुसार दस्तावेज मांगे थे।

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अंत में क्या हुआ?

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद इस मामले का समाधान निकाल लिया गया। जीतू मुंडा को जिला रेड क्रॉस कोष से 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। साथ ही, उन्हें उनकी बहन का मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र भी उपलब्ध करा दिया गया है। पुलिस की मदद से कंकाल को सम्मान के साथ वापस कब्रिस्तान ले जाकर दोबारा दफना दिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और अधिकारियों को लोगों के प्रति अधिक संवेदनशील रहने की सलाह दी है।

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