India-New Zealand FTA ने खोले बड़ी संख्या में नौकरी और निवेश के रास्ते, छोटे-बड़े उद्योगों को भी होगा भरपूर लाभ

न्यूजीलैंड को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलेगा। भारत ने अपने लगभग 70 प्रतिशत शुल्क लाइनों को न्यूजीलैंड के लिए खोल दिया है, जिससे वहां के निर्यातकों को ऊन, लकड़ी, कोयला, शराब, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पादों में अवसर मिलेगा।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता आखिरकार आज नई दिल्ली में हस्ताक्षरित हो गया, जिसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस समझौते पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मकले की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे एक पीढ़ी में एक बार होने वाला महत्वपूर्ण समझौता बताया, जो वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश प्रवाह और श्रम गतिशीलता के लिए नए रास्ते खोलेगा।
हम आपको बता दें कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा। भारत सरकार ने इस अवसर को वैश्विक व्यापार के नए द्वार के रूप में प्रस्तुत किया है। पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में व्यापार करना आसान बनाया जा रहा है, नियमों को सरल किया जा रहा है और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है ताकि विदेशी कंपनियां यहां आकर लाभ कमा सकें और वैश्विक स्तर पर विस्तार कर सकें।
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यह समझौता विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके तहत भारत को न्यूजीलैंड के बाजार में अपने सभी 8284 निर्यात उत्पादों के लिए शत प्रतिशत शुल्क मुक्त पहुंच मिल जाएगी। पहले भारतीय उत्पादों पर औसतन 2.2 प्रतिशत तक शुल्क लगता था और कुछ क्षेत्रों जैसे वस्त्र और चमड़ा उद्योग पर यह शुल्क 10 प्रतिशत तक पहुंच जाता था। अब इन सभी शुल्कों को समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
इसका सीधा लाभ वस्त्र, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य उत्पादों जैसे क्षेत्रों को मिलेगा। विशेष रूप से आगरा का चमड़ा उद्योग, जो लंबे समय से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा था, अब नई संभावनाओं के साथ उभर सकेगा। औषधि क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिली है क्योंकि न्यूजीलैंड अब वैश्विक नियामकों की जांच रिपोर्ट को स्वीकार करेगा, जिससे बार बार जांच की आवश्यकता नहीं रहेगी और लागत कम होगी।
दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलेगा। भारत ने अपने लगभग 70 प्रतिशत शुल्क लाइनों को न्यूजीलैंड के लिए खोल दिया है, जिससे वहां के निर्यातकों को ऊन, लकड़ी, कोयला, शराब, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पादों में अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ेगा, जहां कीवी, सेब और शहद उत्पादन में तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। हालांकि भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है। लगभग 30 प्रतिशत शुल्क लाइनों को समझौते से बाहर रखा गया है। इनमें दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल, चीनी, प्याज, दालें, रत्न और आभूषण तथा धातु क्षेत्र शामिल हैं। इस संतुलन को विशेषज्ञों ने भारत की रणनीतिक सफलता बताया है, जिससे घरेलू उद्योगों को नुकसान नहीं होगा।
हम आपको यह भी बता दें कि इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू पेशेवरों के लिए नए अवसर खोलना है। न्यूजीलैंड हर वर्ष 1667 अस्थायी कार्य वीजा देगा और एक समय में अधिकतम 5000 भारतीय पेशेवर वहां काम कर सकेंगे। इससे सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग और शिक्षा क्षेत्रों के लोगों को विशेष लाभ मिलेगा। निवेश के क्षेत्र में भी यह समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे भारत में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
हम आपको बता दें कि यह समझौता 20 अध्यायों में विभाजित है, जिनमें वस्तु व्यापार, सेवाएं, सीमा शुल्क प्रक्रिया, तकनीकी बाधाएं, विवाद समाधान और कानूनी ढांचा जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। सेवाओं के क्षेत्र में भारत को सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, पर्यटन, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुंच मिली है। देखा जाये तो भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर के आसपास है, जिसे अगले पांच वर्षों में बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। उद्योग संगठनों का मानना है कि यह समझौता सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए भी नए अवसर पैदा करेगा और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में मदद करेगा।
खास बात यह है कि इस समझौते को भारत की उदार व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल शुल्क घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस समझौते को लेकर अपने संदेश में कहा है कि यह भारत के लिए एक व्यापक और संतुलित कदम है, जो एक ओर भारतीय निर्यात पर शुल्क समाप्त कर श्रम आधारित क्षेत्रों को मजबूती देगा, वहीं सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमों को भी नया बल प्रदान करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, जिससे घरेलू किसानों और उद्योगों के हित प्रभावित नहीं होंगे। साथ ही यह समझौता छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसरों का विस्तार करेगा, कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सहयोग देगा और निवेश को प्रोत्साहित करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।
कुल मिलाकर देखें तो भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय खोलता है। यह समझौता व्यापार को गति देगा, निवेश बढ़ाएगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव न केवल व्यापार आंकड़ों में दिखाई देगा, बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहरे और स्थायी संबंधों की नींव भी मजबूत करेगा।
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