Jammu Kashmir के भद्रवाह में Vasuki Nag मंदिर से कैलाश कुंड यात्रा शुरू

डोडा जिले के भद्रवाह में गाथा स्थित प्राचीन वासुकी नाग मंदिर से पवित्र छड़ी मुबारक के प्रस्थान के साथ तीन दिवसीय वार्षिक कैलाश कुंड यात्रा शुरू हो गई है। श्रद्धालु 14,700 फुट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र झील में स्नान करने के लिए नौ सितंबर को कैलाश कुंड पहुंचेंगे। प्रशासन ने कठिन मार्ग को देखते हुए यात्रियों को उचित सावधानी बरतने की सलाह दी है।
भद्रवाह/जम्मू, आठ सितंबर जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गाथा स्थित प्राचीन वासुकी नाग मंदिर से पवित्र ‘छड़ी मुबारक’ के रवाना होने के साथ मंगलवार को वार्षिक तीन दिवसीय कैलाश कुंड यात्रा शुरू हुई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भद्रवाह घाटी के आराध्य देवता माने जाने वाले भगवान वासुकी नाग को समर्पित सदियों पुरानी इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
इस यात्रा में श्रद्धालु पवित्र छड़ी को हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित कैलाश कुंड झील तक ले जाते हैं, जो समुद्र तल से करीब 14,700 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, श्रद्धालुओं का जत्था नौ सितंबर को कैलाश कुंड पहुंचेगा, जहां वे पवित्र झील में स्नान करेंगे। वापसी यात्रा 10 सितंबर से शुरू होगी।
इससे पहले यात्रा का पड़ाव हयान (नल्थी) में होगा। पवित्र छड़ी लेकर रवाना हुए पुजारियों में शामिल मोहित कोतवाल ने कहा, ‘‘यह तीर्थयात्रा अनादि काल से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि भगवान वासुकी नाग भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए भदर-कैलाश झील गए थे।
तब से हमारे पूर्वज जिस धार्मिक परंपरा का अनुसरण करते आए हैं, हम भी उसे पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।’’ वार्षिक कैलाश यात्रा को अनूठी नाग संस्कृति का प्रतीक माना जाता है और इसमें देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल होते हैं। भद्रवाह के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और विधायक दलीप सिंह परिहार भी पवित्र छड़ी के साथ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पिछले पखवाड़े में हजारों पर्यटक कैलाश कुंड यात्रा में शामिल होने के लिए भद्रवाह पहुंचे हैं, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है।
भगवान वासुकी के भक्त और पूर्व विधायक नरेश कुमार गुप्ता ने कहा कि कठिन और दुर्गम रास्तों के बावजूद श्रद्धालु हर साल गहरी आस्था और विश्वास के साथ कैलाश यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को भरोसा है कि भगवान वासुकी नाग उनकी मनोकामनाएं पूरी करेंगे। उन्होंने बताया कि पवित्र कैलाश कुंड झील के आसपास दुर्लभ ऊंचाई वाले औषधीय पौधे पाए जाते हैं।
श्रद्धालुओं की ऐसी मान्यता है कि झील के बर्फीले पानी में स्नान करने से कई बीमारियां दूर होती हैं। पिछले साल 14 अगस्त को पड़ोसी किश्तवाड़ जिले में बादल फटने की घटना के बाद सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को कैलाश कुंड यात्रा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इस हादसे में माछैल माता यात्रा के कई श्रद्धालुओं समेत 63 लोगों की मौत हो गई थी और 30 लोग लापता हो गए थे।
यात्रा से पहले भद्रवाह के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सुनील कुमार भूटयाल ने श्रद्धालुओं के लिए परामर्श जारी किया है। इसमें यात्रा के कठिन स्वरूप को देखते हुए पर्याप्त तैयारी, सावधानी और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
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