विदेश में विविधता की बात, भारत में क्यों नहीं? Mohan Bhagwat के भाषण पर कपिल सिब्बल का तीखा हमला

Kapil Sibal
ANI
एकता । Aug 30 2026 6:18PM

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में विविधता में एकता पर दिए भाषण पर कपिल सिब्बल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या यह भागवत का भाषण था या राहुल गांधी का। सिब्बल ने आरोप लगाया कि विदेश में विविधता की बात करने वाले आरएसएस प्रमुख भारत में इस पर चुप रहते हैं।

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन के बाद भारत में नई सियासी बहस शुरू हो गई है। भाजपा के कई नेता जहां उनके भाषण की तारीफ कर रहे हैं और समर्थन में खड़े हैं, वहीं कांग्रेस ने भागवत की टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भागवत के ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर निशाना साधा है।

यह राहुल गांधी का भाषण है या आरएसएस प्रमुख का?

कपिल सिब्बल ने मोहन भागवत के भाषण पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी बातें सुनकर उन्हें लगा कि यह राहुल गांधी का भाषण है या आरएसएस प्रमुख का। सिब्बल ने कहा कि विदेश में विविधता को स्वीकार करने की बात की जाती है, लेकिन भारत में इसी भावना को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर विदेश में विविधता को स्वीकार किया जाता है तो अपने देश में विविधता को क्यों बर्दाश्त नहीं किया जाता?

मॉब लिंचिंग का भी उठाया मुद्दा

सिब्बल ने कहा कि जब मोहन भागवत न्यूयॉर्क में भारत के लोगों के एक-दूसरे के प्रति संवेदना और एकता की बात कर रहे थे, तो उन्हें राहुल गांधी के बयानों की याद आ गई। उन्होंने मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब भारत में ऐसी घटनाएं होती हैं, तब क्या लोगों के प्रति वही संवेदना दिखाई जाती है, जिसकी बात विदेश में की जा रही है?

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राम मंदिर का भी किया जिक्र

कपिल सिब्बल ने राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिंदू और राम भक्त होने पर गर्व किया जा सकता है, लेकिन जो लोग विविधता के सम्मान की बात करते हैं, उन्हें मंदिर निर्माण से पहले हुई घटनाओं पर भी बोलना चाहिए।

विविधता को लेकर भारत में कितनी बार आवाज उठाई?

सिब्बल ने मोहन भागवत के भाषण में इस्तेमाल किए गए चार शब्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भागवत ने विविधता का जश्न मनाने, सम्मान करने, स्वीकार करने और संरक्षण की बात कही। इसके बाद सिब्बल ने सवाल किया कि भारत में जब विविधता कथित तौर पर खतरे में होती है, तब आरएसएस प्रमुख ने कितनी बार इसके खिलाफ आवाज उठाई?

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अलग दर्शकों के सामने अलग संदेश

कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि मोहन भागवत ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं, जो उनके मुताबिक विविधता को स्वीकार, सम्मान और संरक्षित नहीं करती। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में एक अलग दर्शक वर्ग के सामने अलग संदेश दिया जा रहा है। इसी को लेकर उन्होंने भागवत के विदेश में दिए गए भाषण और भारत की राजनीति में उनके रुख के बीच अंतर पर सवाल उठाए।

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